शिक्षा

आम्बेडकर नगर में सेवा विद्या मंदिर द्वारा अनूठी शिक्षा

दक्षिण दिल्ली में आम्बेडकर नगर के पास बसी दक्षिणपुरी, मूलत: पुनर्वास कॉलनी है। कॉलनी की स्थापना के कुछ वर्ष बाद ही यहां सेवा भारती का केन्द्र शुरू हुआ। कुछ ही समय बाद बस्ती में केन्द्र के उपक्रमों का प्रभाव दिखने लगा। ..

समाज परिवर्तन का केन्द्र बना कोसमडीह छात्रावास

सेवा भारती द्वारा गोंड जनजाति के विद्यार्थीयों के लिए स्थापित बालक छात्रावास, कोसमडीह इस इलाके के सामाजिक प्रगति का केन्द्र है. ..

सेवा भारती का वनवासी आवासीय हायस्कूल, डबरा

ग्वालियर से ४२ कि.मी. दूर डबरा में सेवा भारती का बालक छात्रावास है. सहारिया जनजाती के लडकों के यहॉं प्राधान्य से प्रवेश दिया जाता है...

बैगा बालिका छात्रावास, देवदरा

मध्य प्रदेश के मंडला जिले में, मंडला के समीप देवदरा में स्थित बैगा बालिका छात्रावास की कहानी बहुत ही दिलचस्प है...

श्री दत्ता बाळ सेवाश्रम गाणगापुर का कुष्ठरोगियों के बच्चों के लिए आश्रम

कर्णाटक राज्य के गुलबर्गा जिले में स्थित श्री दत्ता बाळ सेवाश्रम विविध सेवा प्रकल्प चलाता है. संस्था के इन उपक्रमों में कुष्ठरोगियों के बच्चों के लिए चलाया जाने वाला आश्रम अपना विशेष स्थान रखता है...

जनसेवा विद्या केन्द्र, चन्नेनहळ्ळी : शिक्षा के माध्यम से समाजसेवा

१९७२ में बंगलोर (कर्णाटक) के समीप चन्नेनहळ्ळी गॉंव में जनसेवा ट्रस्ट की स्थापना की गई. इस ट्रस्ट ने जनसेवा विद्या केन्द्र शुरू कर शिक्षा के माध्यम से जनसेवा का करने का व्रत लिया...

चेतना स्पेशल स्कूल, करकाला : मतिमंद, विकलांग बच्चों की शाला

करकाला इस पवित्र क्षेत्र की कुछ समर्पित महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मतिमंद एवं विकलांग बच्चों को स्वावलंबी बनाने के लिए काम शुरू करने की ठानी और १ जून २००४ को चेतना स्पेशल स्कूल का प्रारंभ हुआ...

सोनदरा गुरुकुलम्, दोमरी जिला बीड

काम की तलाश में दरबदर भटकने वाले बीड जिले के मजदूरों के बच्चों को शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सोनदरा गुरुकुलम प्रकल्प दीनदयाल शोध संस्थान के अंतर्गत शुरु हुआ...

दादरा-नगर हवेली का वनवासी कल्याण आश्रम

वनवासी कल्याण आश्रम ने दूर-दराज से पढ़ने के लिए शहर में आने वाले विद्यार्थींयों के लिए खानवेल और रांधा में छात्रावास शुरु किये गए है...

सेवा और संस्कार का केन्द्र, शान्ति निकेतन छात्रावास – डगशाई

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में, डगशाई में सेवा-भारती हिमाचल प्रदेश द्वारा असहाय, निर्धन तथा अनाथ बच्चों के लिए एक छात्रावास चलाया जाता है। ..

तोरणा-राजगढ़ परिसर समाजोन्नति न्यास

महाराष्ट्र के तोरणा और राजगढ़ किले के तराई के समीपवर्ती क्षेत्र में, तोरणा-राजगढ़ समाजोन्नति न्यास के प्रयास ने वहॉं के पिछड़े वर्ग के लोगों के जीवन में विकास के अवसर उपलब्ध कराए है...

आतंकवादग्रस्त छात्रों का दिशा छात्रावास, कटरा (जम्मू)

सेवा भारती के दिशा छात्रावास में राज्य के विविध आपदाग्रस्त, अत्यंत गरीब, पिछडे वर्ग के एवं आतंकवादग्रस्त छात्रों को पढाई के लिए निवास और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई गयी है| ..

तेजस्विनी सेवा समिति, यवतमाल

यवतमाल के तेजस्विनी छात्रावास में रहनेवाली, भिन्न-भिन्न परिस्थितियों से आई छात्राओं की वास्तव कहानियॉं हृदय को छूनेवाली है| सन् २००० में स्थापित इस छात्रावास ने, सैकड़ों लड़कियों को जीवन में प्रगति की न.....

यशवंत छात्रावास, चिंधी (माल) चंद्रपुर

चिंधी (माल) में एक बात अन्य पारधी बेड़ों से भिन्न है, और वह है पालों में रहनेवाले अनेक परिवारों के आँखों में तैरते अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के सपने| इन सपनों का आधार है यहॉं का यशवंत छात्रावास| .....

मातृछाया बालकल्याण केन्द्र, हुबली

कर्नाटक राज्य के हुबली शहर में स्थित मातृछाया बाल कल्याण केन्द्र, असहाय बच्चों के जीवन को सही दिशा देने का प्रयास करता है| केन्द्र द्वारा बच्चों के निवास, भोजन एवं शिक्षा की व्यवस्था की जाती है|..

शिक्षा को नया आयाम, विज्ञान आश्रम, पाबळ-पुणे

पुस्तकी शिक्षा के साथ जीवन के व्यवहारिक ज्ञान की जानकारी देना भी होना चाहिए, ऐसा कहा जाता है| लेकिन वास्तव यह है कि कोई भी शिक्षा संस्था ऐसा ढांढस नहीं करती| पाबळ-पुणे के विज्ञान आश्रम ने यह प्रयोग सफ.....

वनबंधू परिषद गोंदिया द्वारा ९० एकल विद्यालय

गोंदिया की वनबंधू परिषद द्वारा सालेकला तहसील में के ९० गॉंवों में एकल विद्यालय चलाए जाते है|..

अण्णाजी कुलकर्णी वाचनालय, भंडारा

स्व. अण्णाजी कुलकर्णी वाचनालय में स्पर्धा परीक्षा के लिए आवश्यक पुस्तकें रखी गई है|वाचनालय २४ घंटे शुरू रहता है|..

नेत्रहीनों के जीवन में ज्ञान प्रकाश फैलाती ‘स्नेहज्योति’

महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के घराडी नामक छोटे गॉंव में, आशाताई कामत और प्रतिभाताई सेनगुप्ता इन दो बहनों ने नेत्रहीन बच्चों के लिए निवासी शाला स्थापन कर उनके जीवन में ज्ञान की ज्योति प्रज्वलित की है|..

श्री सदाशिव बालसदनम् के सेवा उपक्रम

केरल के पूलक्कोडे गॉंव और समीपवर्ती क्षेत्र की पिछड़ी बस्तियों में श्री सदाशिव बालसदनम् आरोग्य जागृति और रुग्णों को सहायता देने के साथ विविध सेवा उपक्रम चला रहा है|मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए आनेवाले.....

सेवा बस्ती के विद्यार्थींयों के लिए अभ्यासिका, काचीगुडा

सेवा बस्ती में रहनेवाले विद्यार्थींयों छोटे-छोटे घरों में पढ़ाई करने के योग्य वातावरण नहीं होने के कारण, क्षमता और प्रतिभा होते हुए भी ये बच्चें आगे नहीं बढ़ पाते है| आंध्र प्रदेश की सेवाभारती ने इस दिशा में नया उपाय ढूंढकर सेवा बस्तियों में अभ्यासिकाओं का ..

एकलव्य आश्रमम्, मंचेरयल

सेवाभारती ने वनवासियों के बच्चों को विकास की धारा से जोड़ने के लिए इस क्षेत्र में कई स्थानों पर निवासी शालाओं की व्यवस्था की है| मंचेरयल का यह एकलव्य आश्रमम् भी इन्ही में से एक है| ..

श्री शंकर चॅरिटेबल ट्रस्ट, केरल

अभागे बच्चों का जीवन सवारने के लिए श्री शंकर चॅरिटेबल ट्रस्ट केरल में काम कर रहा है| अनाथ बच्चों को शिक्षित और सुसंस्कृत बनाकर स्वावलंबी बनाने के लिए ट्रस्ट ने अनाथाश्रम शुरू किए है| इन अनाथाश्रमों में बच्चों के नि:शुल्क निवास-भोजन और शिक्षा की व्यवस्था ..

ज्योर्तिमयी बालिकासदनम् चॅरिटेबल सोसायटी, केरल

ज्योर्तिमयी बालिकासदनम् चॅरिटेबल सोसायटी केरल में पिछडे क्षेत्र के जनजाति महिलाओं के सर्वांगीण विकास का काम कर रही है| गरीब या अनाथ बालिकाओं-महिलाओं को आश्रय देकर उन्हे शिक्षित करना और स्वावलंबी बनाना यह संस्था का मुख्य उद्देश्य है|साथ ही संस्था इस क्षेत्..

समुद्री तुफान पीडित बच्चों का घर : जसोदा सदन

२००९ में, ओडिशा के पास समुद्र में आए तूफान (चक्रावात) में परिवार का छत्र खो चुके बच्चों के पुर्नवास के लिए, कटक में जशोदा सदन द्वारा स्थापित ‘गोकुल’ अपना अलग महत्त्व रखता है|..

संजीवनी समिती, उरकम का ‘बालिकासदनम्’

केरल के उरकम जिले में संजीवनी समिती द्वारा अनाथ, निराश्रित और अत्यंत गरीब लडकियों को आधुनिक शिक्षा के साथ साथ भारतीय परंपरा और जीवनमूल्यों की सीख देने का काम ‘बालिकासदनम्’ के माध्यम किया जा रहा है| ..

संजीवनी समिती का स्वामी आगमानंद बालसदनम्

संजीवन समिती, त्रिचुर संचालित स्वामी आगमानंद बालसदनम् में अनाथ बच्चों की प्राथमिक जरूरतों की पूर्ती के साथही उन्हें मूल्याधिष्ठित शिक्षा उपलब्ध करते हुए भारतीय संस्कृती और परंपरा से भी अवगत कराया जाता है|..

धर्म-रक्षा समिति का गोकुलम् बालसदनम्

रोटी, कपड़ा और मकान यह मनुष्य के जीवन की तीन प्राथमिक आवश्यकताएँ हैं| सारी दुनिया की तरह ही भारत में भी लाखों लोग इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए संघर्ष कर रहे हैं| जिन परिवारों के बच्चों की यह आवश्यकताएँ पूरी नहीं होती, उन परिवारों के बच्चें बाहर की दुनिया..

सरस्वती शिशु मंदिर माध्यमिक आवासीय विद्यालय, सियरमऊ

पिछड़े वर्ग के अनेक बालकों में प्रतिभा होती है, लेकिन शिक्षा के लिए आवश्यक सुविधाओं के अभाव में वे योग्य शिक्षा नहीं ले पाते; इस कारण उन बालकों की प्रतिभा के लाभ से समाज और देश वंचित रहता है| सरस्वती शिशु मंदिर माध्यमिक आवासीय विद्यालय में पिछड़े वर्ग के प्..

रानी दुर्गावती अनुसूचित जनजाति बालिका छात्रावास

लड़कियों के लिए शिक्षा प्राथमिकता का विषय नहीं होता; अत: इन लड़कियों को पढ़ाने के लिए खर्च करना या उन्हें पढ़ाने के लिए प्रयास करना भी बहुत कम होता है| यह स्थिति ध्यान में रखकर भाऊराव देवरस सेवा न्यास, भोपाल ने रायसेन के पास सांची मार्ग पर रानी दुर्गावती अनुस..

विकास भारती के झारखंड में शिक्षा प्रकल्प

दूरदराज के क्षेत्र में रहनेवाले अनेक वनवासी बच्चों के लिए शाला में पढ़ने जाना, यह अभी भी स्वप्नवत है| विकास भारती के कार्यकर्ता इस क्षेत्र के नागरिकों को जीवनावश्यक प्राथमिक सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहे हैं| ..

विकास भारती, झारखंड : वनवासी निरक्षरता निर्मूलन कार्यक्रम

विकास भारती ने वनवासियों के विकास के लिए शिक्षा, आरोग्य, सामाजिक एकात्मता, स्वयं रोजगार की योजनाएँ चलाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम आरंभ किया है| ..

भारत लोक शिक्षा परिषद का एकल विद्यालय

देश के दुर्गम और पहाडी इलाकों में बसे वनवासियों के माथे से निरक्षरता का धब्बा मिटाकर उनके सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए भारत लोक शिक्षा परिषद पिछले ११ सालों से विविध उपक्रमों द्वारा सेवा कार्य में जुटी है|..

विकास भारती, झारखंड : वनवासी लडकीयों मे शिक्षा प्रचार

'विकास भारती' ने पिछडे वर्ग में शिक्षा का प्रसार करना और विशेष रूप से महिलाओं को शिक्षित करने के लिए झारखंड के वनवासी बहुल भागों में प्रभावी कार्य शुरू किया है| ..

विहिंप कन्या छात्रालय, हर्सुल (नासिक)

वनवासी दुर्बल घटक विविध सेवा प्रकल्प के तत्त्वाधान में, विश्‍व हिंदू परिषद द्वारा हर्सूल में चलाए जा रहें कन्या छात्रालय ने आर्थिक दृष्टि से पिछड़ी अनेक वनवासी छात्राओं को निवास और शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराकर उन्हें रोजगार दिलाया है; ये युवतियॉं आज स्वाव..

वनवासी विद्यार्थी वसतिगृह, घोटी

अधुरी शिक्षा सुविधा और गरीबी के कारण वनवासी पढ़ नहीं पाते हैं| इसी समस्या की ओर ध्यानाकर्षण करते हुए विश्‍व हिंदू परिषद ने नासिक जिले के घोटी गॉंव में वनवासी छात्रों के लिए एक वसतिगृह शुरू किया है, जिससे अब इन छात्रों के जीवन में नयी आशा की किरण प्रस्फुटित..

'अता पता' उपक्रम में लीक से हटकर पढाई

बंगलुरू (बंगलोर) की ‘अदम्य चेतना’ नामक एक स्वयंसेवी संस्था ने बच्चों को उनकी पहुँच से बाहर सारे संसाधनों के साथ एक नये तरीके से शिक्षा प्रदान करने के लिए ‘अता पता’ यह एक नया उपक्रम शुरू किया है| ..

पजहास्सी बालमंदिरम्, मनन्तवाडी

अनाथ बालकों को आश्रय देने के लिए केरल के मनन्तवाडी में विश्‍व हिंदू परिषद पजहास्सी बालमंदिरम् चलाता है| आश्रम में बच्चों को शिक्षित और संस्कारित कर आदर्श नागरिक बनाने का हर संभव प्रयास किया जाता है| ..

वनवासी सेवा केन्द्रम् की नि:शुल्क एक शिक्षकी शालाएँ

वनवासियों को शिक्षित और संस्कृत बनाकर उन्हें विकास के प्रवाह से जोडने के लिए अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम से संलग्नित वनवासी सेवा केन्द्रम् तमीलनाडु के सालेम जिले में, कालर्यम के करुमन्दुराई पर्वतीय क्षेत्र में १९८० से काम कर रहा है|..

वनवासी सेवा केंद्रम्, तमीलनाडु : सरस्वति शिशु मंदिर

अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम से संबद्ध तमीलनाडु का वनवासी सेवा केंद्रम् १९८० से राज्य के दुर्गम भागों में बसे वनवासियों के उत्थान-कार्य में जुटा है| इस केंद्र द्वारा वनवासियों के लिये शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी विविध उपक्रम कार्यान्वित किये गये हैं|..

पुनरुत्थान समरसता गुरुकुलम्, पुणे

महाराष्ट्र के पूना शहर में पारधी, कैकाडी, डोंबारी, मरीआईवाले, सोनझरी, तांबट आदि खानाबदोश समाज के बच्चों को गुरुकुल शिक्षा पद्धति से शिक्षा प्रदान कर उनके उत्थान के लिए बेजोड कार्य चल रहा है| सामाजिक समरसता के लिए कार्यरत क्रांतिवीर चापेकर स्मारक समिती ‘पु..

विविध उपक्रमों का केन्द्र गोपली आश्रम, कोलकाता

खरगपुर रेल स्टेशन से करीब ७ किलोमीटर दूर, मानव सेवा प्रतिष्ठान द्वारा गोपली आश्रम की स्थापना की गई| इस आश्रम की विशेषता यह है कि, इसने अपना कार्य केवल धार्मिक क्षेत्र तक ही मर्यादित ना रखकर स्वयं को शिक्षा और समाजसेवा से जोड़ लिया है| ..

जनक-जननी कृपा गुरुकुलम् : पिछड़े, अनाथ बच्चोंको वैदिक शिक्षा

केरल राज्य के वट्टीयूरकवू गॉंव से करीब २ किलोमीटर दूर, जनक-जननी कृपा गुरुकुलम्ने (जेजेके) समाज के पिछड़े और अनाथ बच्चों के लिए सामान्य शिक्षा के साथ वैदिक शिक्षा की व्यवस्था की है| ..

जयगोपाल गरोडिया हिंदू विद्यालय

विद्यार्थींयों को पुस्तकी शिक्षा के साथ जीवन के विविध क्षेत्रों के अनुभवों के प्रात्यक्षिक देना, उन्हें, उनकी चॉंव के अनुसार विविध कला क्षेत्रों में काम करने का उनभव देना, इस विशेष पद्धति से विश्‍व हिंदू विद्या केन्द्र का जयगोपाल गरोडिया हिंदू विद्यालय का..

हिंदू सेवा प्रतिष्ठान का समग्र शिशु शिक्षा प्रकल्प

बच्चों को अनौपचारिक, तणाव रहित और आनंदमय वातावरण में शिक्षा देनी चाहिये, उनपर स्पर्धा का बोझ ना रहे | इस दिशा मे पहल करने वाले संस्थाओं में बंगळुरू स्थित हिंदू सेवा प्रतिष्ठान का नाम अग्रस्थान पर लिया जा सकता है| हर बच्चे की ओर स्वतंत्र रूप ध्यान देकर उनक..

विद्यानिधि ट्रस्ट, चेन्नई

पारिवारिक या आर्थिक कारणों से पिछड़े बच्चों को शिक्षित एवं संस्कारित कर देश का जिम्मेदार नागरिक बनाने का काम तमीलनाडु राज्य की राजधानी चेन्नई में स्थित विद्यानिधि ट्रस्ट कर रहा है| ..

हिंदु सेवा प्रतिष्ठान का ‘सेवा किरण’ प्रकल्प

बंगळुरू (बंगलोर) स्थित हिंदू सेवा प्रतिष्ठान ने एक अनोखा प्रकल्प शुरू किया है| जिसमें हर बच्चे की ओर स्वतंत्र रूप ध्यान देकर उनका शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास किया जाता है| इस प्रकल्प की खासियत यही है कि इस प्रक्रिया में बच्चों के नैसर्गिक क्षमता की ओ..

वैदिक विद्या का जतन करता आर्ष विद्या गुरुकुलम्

पारंपरिक वैदिक विद्या का जतन करने की आज जरूरत है| तमीलनाडू राज्य के कोईम्बतूर जिले के ओनईकट्टी गांव में स्थित ‘आर्ष विद्या गुरुकुलम’ में इस दिशा से सुरू प्रयास आशा के दीप जगाते है| ..

ज्ञान प्रबोधिनी प्रशाला : विचारशील नेतृत्व की निर्माणस्थली

‘सामाजिक परिवर्तन के लिए आत्मिक उन्नती’ इस ध्येय के साथ महाराष्ट्र के पुणे शहर में स्थित ‘ज्ञान प्रबोधिनी प्रशाला’ गत ५० वर्षों से माध्यमिक कक्षाओं के स्तर पर ही छात्रों को ढालने का कार्य कर रही है| विविध क्षेत्रों में नाम रोशन करने वाली कई महान विभूतियॉं..

श्री पूर्णत्रयीश बालाश्रम, तिरूपुनितुरा

केरल में पिछड़े वर्ग के अनाथ बच्चों का पालन करने के लिए तिरूपुनितुरा गॉंव में श्री पूर्णत्रयीश बालाश्रम स्थापित किया गया है| इस आश्रम में निराश्रित बच्चों को केवल आश्रय देकर सुशिक्षित ही नहीं किया जाता; आश्रम के कार्यकर्ता इन बच्चों को ऐसा पितृतुल्य स्नेह ..

दीनदयाल उपाध्याय इन्स्टिट्यूट फॉर फिजिकल हॅण्डीकॅप्ड

विकलांगों को स्वावलंबी और सन्मानपूर्वक जीने की राह दिखाने के लिए १९५० के दशक के प्रारंभ से ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय इन्स्टिट्यूट फॉर फिजिकल हॅण्डिकॅप्ड यह गैर-शासकीय स्वयंसेवी संस्था कार्यरत है| ..

डॉ. हेडगेवार सेवा समिति, नंदुरबार

डॉ. हेडगेवार सेवा समिति नंदुरबार ने महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के वनवासी क्षेत्र में आरंभ किए शिक्षा प्रकल्प में, शिक्षा के साथ रोजगार को जोड़कर कर, शिक्षा के क्षेत्र में नया मार्ग खोजा है|..

वात्सल्य व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्र, दिल्ली

‘वात्सल्य’ पिछड़े वर्ग के लड़के, अनाथ लड़कियॉं और महिलाओं के विकास को प्रधान्य देता है| इस केन्द्र में महिलाओं को उनकी इच्छा के अनुसार व्यक्तिगत या स्वयं सहायता समूह के अंतर्गत उद्योग आरंभ करने का प्रशिक्षण दिया जाता है| ..

स्वदेशी सायन्स मूव्हमेंट, केरळ

विज्ञान और तंत्रज्ञान के क्षेत्र में संपूर्ण स्वदेशी विचारधारा से काम करने वाली स्वयंसेवी संस्था केरळ की स्वदेशी सायन्स मूव्हमेंट (एसएसएम), सामाजिक भाईचारा निर्माण करने में स्वदेशी विज्ञान और तंत्रज्ञान सहाय्यभूत हो सकता है, इस ध्येय को सामने रखकर राष्ट्..

अगस्त्य फाऊंडेशन ने दी नई शिक्षा प्रणाली

शिक्षा, संस्कार और संसार का ज्ञान देनीवाली पद्धति ही सम्यक शिक्षा प्रणाली है| इसका प्रसार ग्रामीण क्षेत्र के उपेक्षित प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के विद्यार्थीयों और शिक्षकों को शिक्षित करने के लिए होना चाहिए, इसके लिए अगस्त्य फाऊंडेशन काम कर रहा है|..

भक्त कन्नप्पा गुरुकुलम्, गोकवरम्

सेवा भारती के भक्त कन्नप्पा गुरुकुलम् ने आंध्र प्रदेश की उपेक्षित चेन्चु वनवासी जाति के लिए शिक्षा के साथ रोजगार और व्यवसाय के द्वार खोलने की दिशा में एक कदम बढ़ाया है| ..

अपाहिज बालकों का अनोखा कार्यक्रम!

यह कार्यक्रम भी सामान्य से अगल - स्वलीन (अपनी ही काल्पनिक दुनिया में खोये रहनेवाले), कर्ण-बधिर, मानसिक रुग्ण बच्चों की शालाओं का था| इन्हीं बच्चों के वर्गमित्र कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे थे| ..

वंदे मातरम् फाऊंडेशन : लडकियों को उच्च शिक्षा लेना आसान किया

विद्यार्थींयों को शिक्षा की धारा से जोड़े रखने के लिए, वंदे मातरम् आंदोलन के शताब्दी वर्ष २००५ में, वंदे मातरम् फाऊंडेशन ने प्रयास आरंभ किए| फाऊंडेशन ने ६०० कार्यकर्ताओं के माध्यम से इस अभियान का प्रारंभ किया| शालाओं को भी इस अभियान से जोड़ा| ..

बाल-मजदूरी के फंदे से मुक्ति : सांदीपनि आवासम् पालमूर

बाल मजदूरी निर्मूलन, यह २१ वी सदी में भी एक बड़ा आव्हान बना है| भारत में भी हजारों बालक इस गर्त में फंसे है| सेवा भारती, पालमूर ने इस संदर्भ में काम करने का निश्‍चय किया| २००२ में पालमूर में सांदीपनि आवासम् की स्थापना की गई| ..

उपेक्षित बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाता है अन्नपूर्णम्मा वसतिगृहम्

१९९४ में चार बालकों को लेकर इस वसतिगृह की स्थापना की गई थी| आज यहॉं कुर्नूल, अनंतपुर और कडप्पा जिलों के बच्चों को रखा जाता है| उनके, पहली से माध्यमिक तक के शिक्षा की व्यवस्था की जाती है| ..

प्रबोधिनी गुरुकुल : प्राचीन परंपरा के साथ आधुनिक शिक्षा

आज की आधुनिक शिक्षा प्रणालि में भी गुरुकुल की प्राचीन परंपरा को कायम रख छात्रों को पूर्ण रूप से विकसित करने का अनूठा प्रयोग कर्नाटक में चिकमंगलूर जिले के हरिहरपुरा गॉंव में देखने को मिलता है|..

बाल मजदूरों के लिए गोल्लूर का ‘माधव आवास’

मजदूरी करनेवाले गरीब बालकों को, मजदूरी के काम से मुक्ति दिलाने के लिए ‘माधव आवास’ छात्रावास ने, उनकी पढाई के साथ, व्यावसायिक प्रशिक्षण की भी व्यवस्था कर उन्हे स्वावलंबी बनाने का मार्ग अपनाया है| ..

सेवा भारती दिल्ली का स्ट्रीट चिल्ड्रन प्रकल्प

पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डन स्थित कलंदर कोलोनी मे रहनेवाले बच्चे माता-पिता के साथ उपजीविका के लिए पैसे कमाने के काम में लगे रहते थे| इन बच्चों को इन कामों से मुक्ति दिलाने के लिए सेवा भारती ने केशव केंद्र शुरू किया और उन्हे शिक्षा, संस्कार, व्यावसायिक ..

शिक्षा, संस्कार का स्रोत : दीनदयाल संशोधन संस्थान

आज की शिक्षा पद्धति, विद्यार्थिंयों को यांत्रिक पद्धति से शिक्षा देकर पैसा कमाने के योग्य बनाती है| इस शिक्षा पद्धति से शिक्षित लोग प्राय: संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्त्व के संदर्भ में भावनाशून्य होते है| यही बात ध्यान में रखकर दीनदयाल उपाध्याय शोध संस्..

एकल विद्यालय : शिक्षा क्षेत्र में एक चमत्कार

एकल विद्यालय यह एक अत्यंत सफल शैक्षिक प्रयोग है| यह कार्य विशेष रूप से वनवासी, ग्रामीण क्षेत्र में चलाया जाता है| कहीं-कहीं नगरों की सेवा बस्तियों में भी एकल विद्यालय चलाए जाते है| पढाई बीच में छोड देनेवाले बच्चे, लडकियॉं ऐसे विद्यालय में नियमित पढाई करें..

चित्रकूट की अनोखी ‘नन्ही दुनिया’

चित्रकूट के दीनदयाल उपाध्याय शोध संस्थान में की ‘नन्ही दुनिया’ बालकों को उनकी पसंद के अनुसार, हँसते-खेलते शिक्षा देने का अनोखा प्रयोग है|..

गुरुकुल आश्रमशाला, उदासा (नागपुर)

इस शाला में आनेवाले विद्यार्थी आर्थिक दृष्टि से पिछड़े है| ऐसी आर्थिक एवं मानसिक दृष्टि से दयनीय अवस्था से आए इन बच्चों में पहले सुरक्षा और आत्मविश्‍वास की भावना निर्माण कर आश्रमशाला उन्हें सुशिक्षित बनाती है|..

उच्च शिक्षा प्राप्त करना, अब उनका ध्येय बन चुका

आज कलन्दर कालोनी के बच्चे नालों के किनारो पर भटकते नहीं, शाला में पढते है, अब उनके हाथों में गिल्ली दंड़े की जगह कलम होती है| शिष्टाचार से रहना-बोलना, अच्छा-बुुरा यह सब वे अच्छी तरह समझने लगे है| उच्च शिक्षा प्राप्त करना यह उनका ध्येय बन चुका है| ..

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