श्री दत्ता बाळ सेवाश्रम गाणगापुर का कुष्ठरोगियों के बच्चों के लिए आश्रम

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स्रोत: Seva-Hindi      तारीख: 29 Oct 2012 17:22:58

$img_titleकर्णाटक राज्य के गुलबर्गा जिले में स्थित श्री दत्ता बाळ सेवाश्रम विविध सेवा प्रकल्प चलाता है. संस्था के इन उपक्रमों में कुष्ठरोगियों के बच्चों के लिए चलाया जाने वाला आश्रम अपना विशेष स्थान रखता है.
समाज में कुष्ठरोग और कुष्ठरोगियों के बारे में भययुक्त भ्रम फैले है. कई लोग, कुष्ठरोग को छूत की बिमारी मानते है. लेकिन यह भय काल्पनिक है. कुष्ठरोग में भी संसर्गजन्य और संसर्गजन्यरहित, ऐसे प्रकार होते है. और कुष्ठरोगी की संतान भी कुष्ठरोगी ही होगी या उनके संपर्क में आने वाले लोगों को भी कुष्ठरोग होगा ही, ऐसा नहीं होता. फिर भी अधिकतर लोग, कुष्ठरोगी ही नहीं तो उनके बच्चों को भी दूर रहने का प्रयास करते है. कुष्ठरोगी और उनके बच्चों का अघोषित बहिष्कार होता है. इसका परिणाम यह होता है कि, कुष्ठरोगियों के स्वस्थ बच्चें, जो सामान्य जीवन जीने के पूर्ण अधिकारी होते है; उनका बहिष्कार कर, समाज अनजाने उनकी प्रगति में रोड़ा बन जाता है. आर्थिक दृष्टि से मजबूत कुष्ठरोगी उनकेबच्चों को अपने किसी दूर के रिश्तेदार के पास या अपरिचित स्थान पर रखकर, उनकी शिक्षा की व्यवस्था कर सकते है. लेकिन जो कुष्ठरोगी आर्थिक दृष्टि से पिछड़े होते है उनके बच्चों का भविष्य, उनके माता-पिता के रोग के कारण अंध:कारमय हो जाता है. शिक्षा और सामाजिक न्याय के अभाव में, इनमें से अधिकतर बच्चें असामाजिक तत्त्वों की दुनिया में भटक  जाते है; इससे अपराध की और एक सामाजिक समस्या निर्माण हो जाती है.
ऐसे कुष्ठरोगियों के बच्चों को उनके माता-पिता के रोग की अकारण सज़ा न मिले, उन्हें अन्य सामान्य बच्चों के समान सम्मानपूर्ण जीवन जीने का पूर्ण अवसर मिले इसलिए श्री दत्ता बाळ सेवाश्रम ने १९८५ में, दत्त संप्रदाय के भक्तों के पवित्र तीर्थक्षेत्र देवल गाणगापुर में विवेकानंद कुष्ठ सेवा समिति के तत्त्वाधान में, कुष्ठरोगियों के स्वस्थ बच्चो के लिए ‘श्री दत्ता बाळ सेवाआश्रम’ स्थापन किया.
आश्रम के एक कार्यकर्ता व्यंकटेश गुरुनायक बताते है, दो एकड़ में बसे इस आश्रम में विद्यार्थींयों के नि:शुल्क निवास, भोजन और शिक्षा की व्यवस्था है. बिजापुर और गुलबर्गा की कुष्ठरोगि कॉलनी के २० बच्चों से इस आश्रम की शुरुवात हुई. गत २५ वर्षों में आश्रम रहकर कई बच्चों ने शिक्षा पूरी की है और वे विविध क्षेत्रों सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं. आज आश्रम में अनेक कुष्ठरोगियों के बच्चें प्रवेश लेना चाहते है. लेकिन आश्रम में इतने बच्चों की व्यवस्था नहीं हो सकती इस कारण प्रति वर्ष बीस-तीस बच्चों को वापस लौटाना पड़ता है. 

स्वयंरोजगार प्रशिक्षण केन्द्र
$img_titleयहॉं पढ़नेवाले बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयंरोजगार एक प्रभावी माध्यम हो सकता है, यह बात ध्यान में लेकर आश्रम इन बच्चों के लिए स्वयंरोजगार प्रशिक्षण केन्द्र शुरु करने की सोच रहा था. बंगलोर की श्रीमती शारदा राव ने उनके पति एम. एस. नीलकंठ राव की स्मृति में दिये एक लाख रुपयों के दान ने आश्रम की यह कल्पना साकार कर दी.  एम. एस. नीलकंठ राव ने वर्धा के महात्मा गांधी मेमोरियल लेप्रसी फाऊंडेशन में काम किया था; इस कारण श्रीमती शारदा कुष्ठरोगियों की पीड़ाओं से परिचित थी. इसी सेवाभाव के पवित्र रज्जु ने आश्रम को यह दान प्राप्त करने में सहायता दी, ऐसी जानकारी व्यंकटेश गुरुनायक  ने दी.
वे आगे बताते है कि, इस केन्द्र के लिए करीब एक लाख साठ हजार रुपयों की आवश्यकता थी. शेष साठ हजार रुपये इस क्षेत्र के दानदाताओं ने दिये. कर्णाटक के कॉंग्रेस प्रदेशाध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र प्रयंक ने इस केन्द्र के लिए दो कंप्युटर दान दिए है. विद्यार्थींयों को अंग्रेजी, गणित और विज्ञान विषय पढ़ाने के लिए शिक्षक नियुक्त करने की भी आश्रम की योजना है. 

नंदगोकुल शिशु गृह
बाढ़, भूकंप और तूफान जैसी नैसर्गिक आपदा या किसी पारिवारिक आपदा के कारण कुछ बच्चों के मातापिता का छायाछत्र छिन जाता है. ऐसे बच्चों को समय रहते यदि आश्रय नहीं मिला तो उनके जीवन की दिशा चूक सकती है. वे गलत रास्ते पर लग सकते है. ऐसे नसीब के मारे बच्चों को आश्रय देकर शिक्षित और सुसंस्कृत बनाने के हेतु से श्री दत्ता बाळ सेवाश्रम ने ‘नंदगोकुल शिशु गृह’ शुरु किया. १९९४ में दो बच्चों के प्रवेश से शुरु हुए इस अनाथाश्रम में आज बीस से अधिक चच्चें रहते है. यहॉं इन बच्चों के नि:शुल्क निवास, भोजन एवं शिक्षा की व्यवस्था है. इन बच्चों को नियमित शिक्षा के साथ सांस्कृतिक एवं नैतिक शिक्षा भी दी जाती है.   

संपर्क
१. श्री दत्ता बाळ सेवाश्रम
देवल, गाणगापुर ५८ ५२ १२
तहसील : अफजलपुर, जिला : गुलबर्गा
(कर्णाटक, भारत)
दूरभाष : + ९१ ०८४७० २७४३६६

२. विवेकानंद कुष्ठ सेवा समिति, गुलबर्गा
वेबसाईट : http://nandagokula.in/contact.html

३. नंदगोकुल शिशु गृह
उडनूर रोड, ५८ ५१ ०५
जिला : गुलबर्गा
(कर्णाटक, भारत)
दूरभाषा : +९१ ०८४७२ २५३०६१
ई मेल : [email protected]

संपर्क व्यक्ति
श्री व्यंकटेश गुरुनायक, मॅनेजिंग ट्रस्टी
दूरभाष : + ९१ ९४४८३८०३६३
श्री सुनील कुलकर्णी (ट्रस्टी)
दूरभाष : + ९१ ९४८०२७२८००

कैसे पहुँचे
गाणगापुर से गुलबर्गा ३५ कि.मी. है और यही समीपतम बडा शहर है.
हवाई मार्ग : गाणगापुर से समीपतम हवाई अड्डा पुणे का है और वह ३५० कि.मी. दूर है.
रेल मार्ग : मुंबई-पुणे-बंगलोर रेल मार्गपर गाणगापुर रोड नामक स्टेशन है. यहॉं से मूल गांव २५ कि.मी. है. बंगलोर या मुंबई, पुणे, सोलापुर से रेल मार्ग से आना सुविधाजनक है.
सडक मार्ग : महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्णाटक के सभी प्रमुख शहरों से गाणगापुर गाव राज्य परिवहन निगम और प्रायवेट बसेस से जुडा है. 

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