सक्षम : दृष्टिहीनों को दृष्टि देने वाली संस्था

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स्रोत: Seva-Hindi      तारीख: 03 Oct 2012 16:30:32

$img_titleदृष्टिहीन देख नहीं पाते, इसलिए हम उनके हाथ में छडी देकर, राह खोजने में केवल उनकी सहायता करते है, उनका खयाल रखते है. दृष्टिहीनों के लिए सेवा कार्य करनेवाली सब संस्थाएँ करीब इसी राह पर चलती है; उनके लिए आधार बनती है. लेकिन उन्हें दृष्टि देकर सृष्टि दिखाने का काम करने वाली संस्थाएँ इनि-गिनि ही है. ऐसी ही एक संस्था का नाम है ‘सक्षम’.
सक्षम का पूर्ण रूप है - समदृष्टि क्षमता विकास और अनुसंधान मंडल - यह संस्था केवल दृष्टिहीनों का आधार ही नहीं बनती, तो उनके सर्वांगीण विकास का काम भी करती है.
undefinedदृष्टिहीनों के लिए पाठ्यपुस्तक ब्रेल लिपि में उपलब्ध होने के कारण वे आज शिक्षा से वंचित नहीं रहते. लेकिन जानकारी से पूर्ण कई पुस्तके अभी भी ब्रेल लिपि में उपलब्ध नहीं है. इस कारण उन पुस्तकों में की जानकारी दृष्टिहीनों तक नहीं पहुँच पाती. उच्च शिक्षा लेते समय भी उन्हें अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है. यह स्थिति ध्यान में लेकर, उच्च शिक्षा और ज्ञान से संबंधित अधिकाधिक पुस्तकें ब्रेल लिपि में उपलब्ध कराने का काम ‘सक्षम’ ने
शुरु किया है. इसके लिए ‘डाटा एन्ट्री’ का काम संस्था के कार्यकर्ता ही करते हैं. कम्प्युटर पर साहित्य डालकर उसका ब्रेल लिपि में रूपांतर किया जाता है. इसके लिए आवश्यक तकनीक संस्था ने
undefinedहासिल की है. अब तक संस्था की ओर से ब्रेल लिपि में अनेक पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी है. इन पुस्तकों में रामदास स्वामी का ‘दासबोध’, संत नामदेव और संत गुलाबराव महाराज की साहित्य संपदा में की पुस्तकें, झॉंसी की रानी और लोकमान्य तिलक जैसे चरित्र और ‘रानवाटा’ जैसे जंगल से संबंधित, रोचक विषय की जानकारी के पुस्तक का समावेश है.
undefinedदृष्टिहीनों को शिक्षा या जानकारी हासिल करने में हमारी बहुत सहायता होती है. हमने पढ़कर सुनाई या बताई जानकारी सुनकर, अनपढ़ दृष्टिहीन भी ज्ञान ग्रहण कर सकता है. यह बात ध्यान में रखकर ‘सक्षम’ ने ‘माधव ऑडिओ बुक लायब्ररी’ शुरु की है. इस लायब्ररी में करीब दस हजार पुस्तकों की कॅसेट और सीडी उपलब्ध है. संस्था के कार्यकर्ता ही उनकी आवाज में पुस्तकें ध्वनिमुद्रित करते है. कई दृष्टिहीन इस लायब्ररी का लाभ लेते है.
undefinedदृष्टिहीनों के लिए उपयुक्त नए उपकरणों का लाभ उन तक पहुँचाने के लिए, संस्था का संशोधन विभाग जागरूक रहता है. इस कारण संस्था दृष्टिहीनों के लिए उपयुक्त आधुनिक साधनों का उपयोग करने में सफल रही है.
‘सक्षम’ ने मोबाईल फोन के आकार का ‘ऑडिओ बुक रिडर’ बनाया है. ‘अबरार’ इस संक्षिप्त नाम से पहचाने जाने वाले इस ‘ऑडिओ बुक रिडर ऍण्ड रेकॉडर’ में बारवी तक का संपूर्ण अभ्यासक्रम समा सकता है. पुस्तक का कोई पृष्ठ तुरंत खोलने के समान, ‘अबरार’ में अपेक्षित जानकारी तक सहज पहुँचा जा सकता है. इसका उपयोग अनेक लोग एक साथ कर सकते है और आकार में छोटा होने के कारण उसे आसानी से अपने पास रख सकते है. ‘अबरार’ की आंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दखल ली गई है, यह उल्लेखनीय.
$img_titleअक्सर देखा जाता है कि, नेत्रहीन व्यक्ति किसी न किसी कला मेंमाहिर होते है. उन्हें ’अबरार’ से अपनी कला निखारने में सहायता मिलती है. गाने में ‘अबरार’ पेटी (बाजे) की संगत कर सकता है. इसमें ध्वनिमुद्रित संगीत, नेत्रहीनों को अभ्यास के लिए सहायक सिद्ध होता है. अंध और विकलांग कलाकार अब संगीत के कार्यक्रम प्रस्तुत करने में भी ‘अबरार’ का उपयोग करते देखे गए है.
undefinedदृष्टिहीनों के सर्वांगीण विकास का विचार करते समय ध्यान में आया कि, हमारे देश में दृष्टिहीन माने जाने वालों में करीब ७५ प्रतिशत अल्प दृष्टि वाले (लो व्हिजन) है. वे पूर्णत: अंध नही होते. कुछ प्रतिशत - करीब २० प्रतिशत (धुँधला) ही सही - देख पाने की क्षमता रखते है. ऐसे रुग्णों के लिए ‘सक्षम’ ने ‘अल्प दृष्टि सुधार केन्द्र’ स्थापन किया है. उन्हें, दृष्टिदोष कम करने वाले उपकरणों का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है. पुणे के डॉ. रमेश साठे ने इसके लिए बनाए उपकरण केन्द्र में उपलब्ध है. केन्द्र के प्रशिक्षित कार्यकर्ता रुग्णों की जॉंच कर, उन्हें इन उपकरणों के प्रयोग के बारे में जानकारी देते है. इन उपकरणों के प्रयोग से धुँधला देखने की क्षमता रखने वाले स्वावलंबी बनने की दिशा में काफी आगे बढ़ जाते है.  

नेत्रदान अभियान
$img_titleप्रकृति ने दिए हुए कुछ अवयवों का पुन: उपयोग कर, किसी का जीवन बन सकता है. दृष्टिदोष दूर करने संबंधि हुए संशोधनों के परिणामस्वरूप, मृत व्यक्ति के कॉर्निआ (पुतली) का दृष्टिहीनों की आँखों में रोपण कर उन्हें दृष्टि का दान दिया जा सकता है. इसके लिए, मृत्यु के बाद लोग नेत्रदान करें, इस बारे में ‘सक्षम’ ने नेत्रदान अभियान चलाया है; और नेत्र-संग्रह के लिए माधव नेत्रपेढी स्थापन की है. १९९५ से इस काम की शुरुवात हुई. आज देश भर में ३६ नेत्रपेढी हैं, ‘सक्षम’ ने यह संख्या सौ तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है.
undefinedनेत्रदान अभियान का काम आव्हानपूर्ण और लगन का है. कारण, नेत्रदान के बारे में समाज में अनेक भ्रामक कल्पनाएँ है. देश में प्रतिवर्ष करीब एक करोड़ लोगों की मृत्यु होती है; उनमें से केवल तीस-पैतीस हजार का ही नेत्रदान होता है. नेत्र उपलब्ध हो, तो देश के करीब ४६ लाख दृष्टिहीनों की आँखों को रोशनी मिल सकती है.
undefinedआँखों की बीमारी ‘अ’ जीवनसत्त्व की कमी के कारण होती है. जन्मत: होने वाली आँखों की बीमारियों को टालने के लिए ‘सक्षम’, गर्भवती महिलाओं के बीच जागृति करने का भी काम करती है. इसके साथ नेत्रदान अभियान का प्रचार करने के लिए पथनाट्य का भी प्रयोग किया जाता है.
सेवा में स्पर्धा नहीं, इस भावना से ‘सक्षम’ सेवा कार्य चलाती है. इस कारण किसी भी क्षेत्र में काम करनेवाली संस्था को सहायता देने, या किसी संस्था से सहायता लेने में ‘सक्षम’ हिचकती नहीं. सेवा का उदात्त लक्ष्य सामने रखकर ‘सक्षम’ अपना काम कर रही है. 

संपर्क 
डॉ. अविनाशचन्द्र अग्निहोत्री
सक्षम
१६, देवदत्त भवन,
राणा प्रताप नगर चौक
नागपुर ४४ ०० २२
(महाराष्ट्र, भारत)
फोन : ०७१२-२२४४९१८
मोबाईल : ० - ९४२२१४५५५४
ई-मेल : [email protected]
वेबसाईट :
www.esakshamseva.org 


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