गुरुकुल के कारण हुई आयआयटी की पढ़ाई

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स्रोत: सेवा सुरभि      तारीख: 20 Dec 2012 15:50:51

वरुण. एक बढ़ई का लड़का. २०१० की मॅट्रिक की परीक्षा में राज्य में सातवा आया. आयआयटी में पढ़ना चाहता था. लेकिन आर्थिक मर्यादाओं के कारण आयआयटी प्रवेश की कोई राह दिखाई नहीं दे रही थी. और एक दिन भागलपुर गुरुकुल शिक्षा संस्थान के दो लोग वरुण के घर आये और उसके पिताजी से कहा, हम वरुण की सफलता से प्रभावित है, संस्थान उसके पढ़ाई की नि:शुल्क व्यवस्था करना चाहता है! यह प्रेरक कहानी वरुण के ही शब्दों में - 

‘‘मैनें पिता को दिन-रात मेहनत करते देखा है. वे चाहते है कि हमारी पढ़ाई में कोई बाधा न आए. वे बढ़ई है. दिन-रात कड़ी मेहनत करते है. फिर भी परिवार का गुजारा जैसे-तैसे ही होता है. लेकिन उन्होंने हमेशा हम बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी है, हमें पढ़ाई के लिए प्रोत्साहन दिया है.
वर्ष २०१० में हुई मॅट्रिक की परीक्षा में मैंने राज्य में सातवा क्रमांक पाया था. बहुत खुशी हुई. लेकिन साथ ही उच्च पढ़ाई के लिए खर्च की चिंता ने अस्वस्थ किया. पिताजी हौसला बंधाते थे, कहते, ‘‘तुम कुछ मत सोचो. कुछ न कुछ व्यवस्था हो जाएगी.’’
मैं इंजीनियर बनना चाहता था. लेकिन पिछड़ी आर्थिक स्थिति के कारण आशंकित था. और एक दिन इस समस्या का हल चलकर खुद हमारे घर आया! भागलपुर गुरुकुल शिक्षा संस्थान के दो लोग हमारे घर आये और पिताजी से कहा, संस्थान वरुण की सफलता से प्रभावित है और उसके पढ़ाई की नि:शुल्क व्यवस्था करना चाहता. यह मेरे जीवन का टर्निंग प्वाईंट था. मैं आज तक कभी घर से दूर नहीं गया था, मेरे पिताजी भी मुझे अकेले घर से दूर भेजने की कल्पना नहीं कर सकते थे. उन्होंने संस्थान के लोगों से गुरुकुल में मेरे भोजन, निवास और अन्य व्यवस्था के बारे में अनेक शंकाए पूछी. संस्थान से आये लोगों ने पिताजी के सब प्रश्‍नों का समाधान करने के बाद, पिताजी मुझे गुरुकुल में भेजने के लिए तैयार हुए.
संस्थान में मुझे मिलनसार साथी मिले. हम लोगों के बीच कभी ऐसी बात नहीं होती कि कोई अधिकारी का बेटा है, कोई सामान्य कर्मचारी का या कोई बढ़ई का. इसलिए कभी भी किसी के मन में हीन भावना नहीं पनपी. पढ़ाई का एक अच्छा माहोल बना रहता था. इसी का नतीजा है कि मैं आयआयटी की परीक्षा में सफल हुआ. अब मैं युपीएससी की तैयारी करने की सोच रहा हूँ.’’

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(आधार : सेवा सुरभि, अगस्त-सितंबर २०१२)