सेवा भारती का वनवासी आवासीय हायस्कूल, डबरा

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स्रोत: Seva-Hindi      तारीख: 09 Jan 2013 17:54:39

$img_titleग्वालियर से ४२ कि.मी. दूर डबरा में सेवा भारती का बालक छात्रावास है. स्थानीय सहारिया जनजाती के लडकों के यहॉं प्राधान्य से प्रवेश दिया जाता है.
१० जुलाई २००३ में, किराये के एक मकान में हुए इस छात्रावास में आरंभ में ६ वी से ८ वी कक्षा में पढ़ने वाले ३५ छात्र थे. धीरे- धीरे छात्रों की संख्या बढ़ते गई. बढती हुई छात्राओं की संख्या की व्यवस्था के लिए २००६ में छात्रावास के लिए बड़ी जगह किराये से ली गई. लेकिन तेजी से बढ़ती छात्रों की संख्या के कारण जगह की समस्या स्थायी रूप से हल नहीं हो पा रही थी. फिर छात्रावास के लिए दो एकड़ का विशाल भूखंड खरीदना तय किया गया. भूखंड खरीदने के बाद भवन के निर्माण की समस्या खड़ी हुई. पैसा कहॉं से लाए? उसी दौरान अमेरिका निवासी, भारतीय मूल के सॉफ्टवेअर अभियंता पंकज जी माहेश्‍वरी, पिता के  अंतिम संस्कार के लिए ग्वालियर आये थे. संजोगवश उनका ध्यान डबरा छात्रावास के कार्य की ओर आकृष्ट हुआ और उन्होंने छ़ात्रावास के भवन के लिए तीन किस्तों में १५ लाख रुपये दान दिए. इस उदार दान से छात्रावास का भवन निर्माण हुआ.

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$img_titleफिर अन्य दानदाता भी सामने आए. तत्कालीन सांसद यशोधरा राजे सिंदिया और राज्य सभा के सांसद कप्तान सिंह सोलंकी की ओर से प्राप्त ५० लाख रुपयों से पहली मंजिल पर दस हजार वर्ग फीटका निर्माण कार्य किया गया. १८ दिसंबर २०१० में इस ‘सेवाधाम’ का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी के हस्ते संपन्न हुआ.    
छात्रावास के ४९ गॉंवों से आए १३७ छात्र ६ वी से १० वी कक्षा में पढ़ते है. पढ़ाई मध्य प्रदेश राज्य बोर्ड के अभ्यासक्रमानुसार होती है. कुछ छात्रों ने २०१० की परीक्षा में १०० प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी उच्च योग्यता सिद्ध की है.

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$img_titleसमाज परिवर्तन में यह छात्रावास महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. छात्रावास के संस्कारों ने यहॉं के छात्रों के चरित्र में आश्‍चर्यजनक परिवर्तन किया है. उन्होंने मांसाहार और शराब की प्रथा का त्याग किया है. छात्रों के इन संस्कारों का परिणाम अब उनके समाज में भी दिखने लगा है. छात्रों के परिवार को भी समाज के मुख्य प्रवाह से जोडने और उन्हें पाल्यों के प्रगति की जानकारी देने के दोहरे हेतु से छात्रावास पालक सभाओं का नियमित आयोजन करता है.  
मध्य प्रदेश के मोरेना, शेओपुर, भिण्ड, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, विदीशा और गुना इन जिलों में स्थित सहारिया जनजाति प्राचीनतम है. इस जनजाति को बैगा जनजाति समान ‘संकटग्रस्त जनजाति’ का दर्जा दिया गया है. मध्य प्रदेश में सहारिया जनजाति की जनसंख्या करीब ४ प्रतिशत है. उन्हें ‘संरक्षित’ विशेष दर्जा दिया गया है.
सहारिया जनजाती के लोग अधिकांश पर्वतीय क्षेत्र में रहते है. वे स्वयं को रामायण कालीन शबरी के वंशज मानते है. स्वाभाविक ही वे स्वयं को हिंदू मानते है और तेजाई, ढाकर बाबा, दुर्गा, हनुमान, लालबाई और बेजासन की पूजा करते है. सावनी अमावस, जन्माष्टमी, रक्षाबंधन दीपावली, होली और तेजा दशमी आदि त्यौंहार मनाते है. 

संपर्क
वनवासी आवासीय हायस्कूल
सेवाधाम नगर, डबरा
जिला ग्वालियर
(मध्य प्रदेश, भारत)
दूरभाष : ०७५२-२२३९६४ 

कैसे पहुँचे
डबरा गांव ग्वालियर से ४२ कि.मी. दूर है.
हवाई मार्ग : डबरा से ५० कि.मी. दूर ग्वालियर में हवाई अड्डा है. लेकिन दिल्ली या भोपाल हवाई अड्डे पर उतरकर डबरा आना सुविधाजनक है. डबरा और दिल्ली की दूरी ३६९ कि.मी. तथा डबरा-भोपाल दूरी ३४६ कि.मी. है.
रेल मार्ग : भोपाल-नई दिल्ली रेल मार्ग पर डबरा स्टेशन है. एक्सप्रेस रेल गाडीयॉं यहॉं रुकती है.
सडक मार्ग : राष्ट्रीय महामार्ग ७५ डबरा से गुजरता है. मध्य प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों से डबरा, सडक से जुडा है.

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