छात्राओं के लिए 'मैत्रेयी गुरुकुलम्'

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स्रोत: Seva-Hindi      तारीख: 28 Feb 2013 12:22:05

$img_titleवैश्वीकरण के इस दौर में वैदिक पद्धति से अध्ययन अथवा अध्यापन आश्चर्यजनक लगता है। परन्तु 'मैत्रेयी  गुरुकुलम्'  ऐसा ही शिक्षालय है जहां वैदिक विधि से अध्ययन-अध्यापन किया जाता है। वैदिक काल में एक समय ऐसा था जब वेद विद्या में महिलाओं का सहभाग था। मैत्रेयी इन विद्वानों में से एक थी। उसी परम्परा के संरक्षण व संवर्धन का ध्येय लेकर केवल छात्राओं के लिए हिंदू सेवा प्रतिष्ठान (कर्नाटक) से जुड़े स्थानीय ट्रस्ट के तत्त्वावधान में यह गुरुकुलम् चलाया जाता है।

कर्नाटक राज्य के दक्षिण कन्नड जिले की बंतवाल तहसील के मुरूकाजे गांव में नारियल, सुपारी, कटहल और रबर के पेड़ों से घिरे करीब सौ एकड़ के हर भरे क्षेत्र में यह  गुरुकुलम् बसा है। यहां सौ से अधिक छात्राएँ वेद, उपनिषद, भागवत, रामायण, महाभारत के साथ व्याकरण और आधुनिक विषयों का अध्ययन करती हैं।

$img_titleहिंदू परम्परा में शिक्षा, औषधि और अन्न, - इन तीन जीवनावश्यक बातों के संदर्भ में व्यापारी वृत्ति मान्य नहीं। मैत्रयी  गुरुकुलम् में इस परम्परा का पालन किया जाता है। यहां की छात्राओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। छात्राओं के लिए गुरूकुलम् में शिक्षा, भोजन एवं निवास की नि:शुल्क व्यवस्था है। गुरुकुलम् के लिए आवश्यक धन की व्यवस्था जन सहयोग से होती है। यहां पढ़नेवाली लड़कियां पिछड़े क्षेत्र से आती हैं। यहां शिक्षकों में अधिकतर महिलाएं हैं, इनमें से कुछ हिंदू सेवा प्रतिष्ठान की पूर्णकालीन शिक्षिकाएं हैं।
गुरुकुलम् में दस वर्ष से अधिक आयु की हिंदू बालिकाएं प्रवेश ले सकती हैं। प्रति वर्ष बीस बालिकाओं को छह वर्ष के प्रथम अभ्यासक्रम के लिए प्रवेश दिया जाता है। इसके बाद उच्च अभ्यासक्रम की भी व्यवस्था है, लेकिन वह ऐच्छिक है। एक जनसेवी संस्था ने इस उपक्रम को मान्यता दी है और वही संस्था इस गुरुकुलम् में प्रवेश के लिए परीक्षा भी लेती है।

$img_titleसौ एकड़ क्षेत्र में फैले, करोड़ों रुपयों की यह भू-सम्पत्ति एक दम्पति की थी। वे अपने दो सौ कुत्तों के साथ यहां आनंद से रहते थे। वे अपने कुत्तों को भगवान मानकर उनकी सेवा करते थे। पति के निधन के पश्चात उसकी पत्नी, जो कि वृद्ध हो चुकी थी, की इच्छा थी कि उनकी सम्पत्ति का उपयोग महिलाओं के किसी सामाजिक उपक्रम के लिए होना चाहिए। इसके लिए वे यह भूखंड़ किसी स्वयंसेवी संस्था को दान स्वरूप देना चाहती थी। इस संदर्भ में उन्होंने संघ के एक कार्यकर्ता से बात की और महिलाओं के उत्थान के लिए अपनी इस भू-सम्पत्ति का दान करने की इच्छा व्यक्त की। लेकिन इतने बड़े भूखंड की देखभाल करने के लिए मेरे पास मनुष्य-बल नहीं है, ऐसा कहकर उस कार्यकर्ता ने दान लेने से मना कर दिया। किंतु, अपने निर्णय पर वह महिला दृढ़ थीं। एक दिन उस महिला ने संघ के कार्यकर्ता को चौका दिया; वह अपनी सम्पत्ति के सारे कागजात संघ कार्यकर्ता को सौंपकर चली गई| वह कहां जा रही है, इस बारे में उसने कोई जानकारी नहीं दी। फिर वहां के संघ कार्यकर्ताओं ने एक होकर उस दानी महिला का स्वप्न साकार करने का निश्‍चय किया और इस प्रकार मैत्रेयी गुरुकुलम् का श्रीगणेश हुआ।

सम्पर्क
मैत्रेयी गुरुकुलम्
मुरूकाजे
तहसिल - बंतवाल
जिला - दक्षिण कन्नड
(कर्नाटक, भारत)
ई-मेल : [email protected]
[email protected]

कैसे पहुंचे  
सड़क मार्ग : मैत्रेयी गुरुकुलम् में पहुंचने के लिए हमें मंगलोर से बन्तवाल होते हुए आना होगा। मंगलोर से बन्तवाल 16 कि. मी. दूरी पर है और बन्तवाल से विट्ठला होते हुए हम मुरूकाजे पहुंच सकते हैं। मंगलोर से विट्ठला 40 कि. मी. दूर और वहां से मुरूकाजे 4 कि. मी. है।
रेल मार्ग : मंगलोर यह दक्षिण रेल्वे पर महत्वपूर्ण स्टेशन है। भारत के कोच्ची, चेन्नई, बंगलुरु, तिरुवनंतपुरम् सभी प्रमुख शहरों से अनेक रेल गाड़ियां मंगलोर जाती हैं।
हवाई मार्ग : मंगलोर का बाजपे हवाई अड्डा शहर से 10 कि. मी. दूर है। बंगलुरु और चेन्नई से मंगलोर के लिए नियमित उड़ानें हैं।
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