रांची में स्वयं सहायता समूह की त्रिदिवसीय राष्ट्रीय बैठक

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स्रोत: Seva-Hindi      तारीख: 15 Mar 2013 13:59:36

स्वयं सहायता समूह की राष्ट्रीय बैठक, रांचीरांची : जोन्हा स्थित बिरसा सेवा प्रकल्प में राष्ट्रीय सेवा भारती, झारखंड के तत्त्वाधान में आयोजित, विभिन्न राज्यों में कार्य करने वाले स्वयं सहायता समूह के कार्यकर्ताओं का अखिल भारतीय त्रिदिवसीय सम्मेलन विगत 1 से 3 मार्च, 2013 को सम्पन्न हुआ।

स्वयं सहायता समूह की राष्ट्रीय बैठक, रांचीइस सम्मेलन में भारत के 16 राज्यों से कुल 51 स्वयं सहायता समूहों के 76 पुरुष एवं 81 महिला सहित 157 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस सम्मेलन का विधिवत् उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. नरेन्द्र भाई देसाई सहित श्री प्रेमचंद गोयल, श्री सुहास हिरेमठ ने भारतमाता पूजन के साथ किया।

स्वयं सहायता समूह की राष्ट्रीय बैठक, रांचीउद्घाटन सत्र को सम्बोध्ति करते हुए डा. देसाई ने कहा कि- ‘‘स्वयं सहायता समूह में कार्य करनेवाले अपने कार्यकर्ताओं का यह सम्मेलन झारखंड के पवित्र धरती पर प्रारंभ हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में चल रहे विभिन्न आयामों का एक दूसरे के बीच संचार होना कि जिससे हम आपस में एक दूसरे को समझ कर अपने अनुभवों का आदान-प्रदान कर कार्य को एक गति दे सकें। आज भारत में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जो कार्य चल रहें हैं उसका सकारात्मक परिणाम ये हुआ कि हजारों परिवार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन परिवार और समाज को सम्मानित जीवन प्रदान कर रहें हैं। बगैर सरकारी सहायता के लाखों परिवार आज निरंतर अपने आर्थिक स्बावलंवन को इस समूह से जुड़कर प्राप्त कर रहें हैं।

नाबार्ड की ओर से उप महाप्रबंधक श्री विजय चौधरी ने, नाबार्ड के माध्यम से चल रहे गतिविधियोंका का परिचय कराया। राष्ट्रीय सेवा भारती के श्री सुन्दर लक्ष्मण, श्री गुरुशरण प्रसाद, श्रीमती चन्द्रिका चौहान आदि ने भी अपने विचार रखे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सेवा प्रमुख श्री सुहास हिरेमठ ने समापन सत्रा को सम्बोधित करते हुए कहा कि, प्रत्येक जीव-जन्तु, प्राणी सुख प्राप्ति के लिए दौडा करता है; परन्तु सच्चा सुख धन-दौलत या भौतिक संसाधन में ही नही है, वरन् सेवा में है| सेवा कार्य, सहयोग, समर्पण के कारण, ईश्‍वरीय कार्य से आत्मसंतुष्टि के साथ साथ आनन्द की अनुभूति होती है।

गुजरात से आए प्रतिनिधियो ने ‘कल्पतरु’ नामक नई प्रयोग का परिचय लोगों के बीच रखा।

स्वयं सहायता समूहों का यह त्रिदिवसीय सम्मेलन समस्याओं एवं समाधन तथा चर्चा गटों के माध्यम से एक-दूसरे को समझने का सराहनीय प्रयास था।

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