सेवा भारती, पूर्वाञ्चल का ‘सेवा संगम’

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स्रोत: Seva-Hindi      तारीख: 02 Mar 2013 16:12:14

Purvanchal Seva Sangam 2013गुवाहाटी : मार्च २०१३ : राष्ट्रीय सेवा भारती, दिल्ली की प्रेरणा से तथा सेवा भारती पूर्वाञ्चल के तत्त्वावधान में २३ व २४ फरवरी २०१३ को उत्तर असम प्रान्त केन्द्र गुवाहाटी में सेवा संगम का कार्यक्रम सफलतापूर्ण संपन्न हुआ| इस सेवा संगम में लगभग ५० के करीब सेवा संस्थाओं ने भाग लिया था|

२३ फरवरी को उद्घाटन कार्यक्रम में भारत सेवाश्रम संघ के पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रमुख, स्वामी साधनानंद महाराज द्वारा दीप प्रज्वलन कर सेवा संगम का शुभारंभ हुआ|

उद्बोधन में महाराज जी ने कहा कि, सबको एकसाथ मिलकर काम करने तथा कोई भी क्षेत्र व व्यक्ति न छूटे इसके ओर सभी सेवा कार्यकर्ताओं ने ध्यान देना चाहिए|

राष्ट्रीय सेवा भारती के सह संयोजक गुरुशरण प्रसाद ने सेवा संगम की भूमिका तथा राष्ट्रीय सेवा भारती की कल्पना सबके सम्मुख रखी|

Purvanchal Seva Sangam 2013इस सेवा संगम में डॉ. दिलीप सरकार लिखित १५० पृष्ठवाली, आरोग्य मित्र योजना के पाठ्यक्रम की पुस्तक (Arogya Mitra Curriculam) का उन्मोचन स्वामी साधनानंद महाराज के करकमलों से हुआ|

सेवा भारती, पूर्वाञ्चल सहित विभिन्न सेवा संस्थाओं ने अपनी अपनी कार्य की प्रदर्शनी लायी थी, जो देखकर उपस्थित लोगों के मन उत्साह से भर जाते थे| इस प्रदर्शनी गृह का उद्घाटन सेवा भारती, पूर्वाञ्चल के वरिष्ठ कार्यकर्ता डॉ. दिलीप सरकार ने किया|

दो दिन विविध सत्रों में विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई| अपने अपने सेवा संस्था का कार्यवृत्त तथा सामाजिक क्षेत्र में कार्य करते समय आये अनुभवों का कथन हुआ| सम्मिलित प्रतिनिधियों ने मिलकर काम करने का संकल्प लिया|

२४ फरवरी को दोपहर सेवा संगम का समापन कार्यक्रम हुआ| इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रमोद प्रकाश श्रीवास्तव (निवृत्त आएएस अधिकारी व नार्थ इस्ट कौन्सिल के भारत सरकार के वर्तमान प्रतिनिधि), विशिष्ट अतिथि इस नाते अबनी दास (गुवाहाटी कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर के प्रतिष्ठाता) तथा पंकज बोरा (एनजीओ असोसिएशन ऑफ असम के सचिव) उपस्थित थे|

समापन कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रमोद प्रकाश श्रीवास्तव ने दीप प्रज्वलन से किया| इस सत्र में अपने अपने क्षेत्र में सेवाभाव से कार्यरत संस्था तथा व्यक्तियों का मानचिह्न तथा पारंपरिक असमीया गमछा देकर सम्मान किया गया| मुख्य वक्ता के नाते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सेवा प्रमुख सुहासराव हिरेमठ ने उपस्थित प्रतिनिधिओं को सम्बोधित किया| अपने समापन भाषण में उन्होंने, सेवा क्या है? किसे सेवा कहते है? हमारा लक्ष्य क्या होना चाहिए? आदि विषयों पर विस्तार से समझाया| सेवा कार्य निरपेक्ष व निस्वार्थ भाव से करना चाहिए इसका आग्रह किया|

दोनो दिन कार्यक्रमों का संचालन सेवा भारती के कार्यकर्ता पंकज जालान ने किया| अतिथि तथा प्रतिनिधियों का सम्मान, स्वागत समिति के अध्यक्ष ज्योतिर्मय पुरकायस्थ ने किया| इस सम्मेलन में रा. स्व. संघ के असम क्षेत्र प्रचारक उल्हास कुळकर्णी, उत्तर असम प्रांत संघचालक डॉ. उमेश चक्रवर्ति तथा अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे|

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