सेवा भारती, तमिलनाडु का ‘तिरपराप्पु’ स्वयं सहायता गुट

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स्रोत: Seva-Hindi      तारीख: 23 Mar 2013 17:44:30

तिरपराप्पु स्वयं सहायता गुटग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण का प्रभावी मार्ग

सेवा भारती द्वारा करीब 12 वर्ष पूर्व तमिलनाडु में स्वयं सहायता गुट का उपक्रम शुरू किया गया। एक दशक बाद यह, राज्य के आर्थिक सशक्तीकरण और सामाजिक-राजनीतिक सुप्त क्रांति का मार्ग बन चुका है। 1999 से सेवा भारती इस "स्वयं सहायता गुट" (मायक्रो क्रेडिट डिलेव्हरी सिस्टिम) के माध्यम से यहां की महिलाओं के स्वावलंबन की दिशा में कार्यरत है। इस उपक्रम ने आज सम्पूर्ण देश का ध्यान आकृष्ट किया है। महिलाओं के लिए शुरू की गई यह योजना अब पुरुषों में भी लोकप्रिय हो गई है। सेवा भारती, यह अकेला संगठन है जो आज भी तमिलनाडु में चार हजार से अधिक महिलाओं तथा चार सौ से अधिक पुरुषों के स्वयं सहायता गुटों का मार्गदर्शन कर रहा है।

स्वयं सहायता गुट बीस या उससे कम सदस्यों का छोटा संगठित सहकारी गुट होता है। किसी भी नाम से संगठित इस गुट में व्यवस्था और बैंक खातों के व्यवहार को देखनेवाले तीन पदाधिकारी होते हैं। गुट का प्रत्येक सदस्य नियमित रूप से पैसे जमा करते हैं और यह संचित राशि सदस्यों को व्यवसाय के लिए नाममात्र ब्याज पर दिये जाते हैं। यह सारा व्यवहार पूर्णत: पारदर्शी होता है। इसका व्यवस्थित लेखा परिक्षण (ऑडिट) किया जाता है। इसमें दी गई आर्थिक सहायता पर ब्याज बहुत कम होने के कारण गुट के सदस्यों को ऊंची दर पर ब्याज लेने की समस्या से छुटकारा मिल जाता है और गुट सदस्यों को स्वयं के व्यवसाय या उत्पादन इकाइयों को प्रारंभ करने में सहयोग मिलता है।

आर्थिक व्यवस्था में 'द मायक्रो-क्रेडिट डिलेव्हरी सिस्टिम' के नाम से परिचित यह व्यवस्था हर किसी के लिए बचत, आर्थिक सहायता व स्वावलम्बन का अवसर प्रदान करता है। गुट के सदस्य अपने कर्ज पर जो ब्याज देते हैं उसका लाभ उन्हें गुट के लाभांश (डिविडण्ड) में वापस मिल जाता है। इसके अतिरिक्त इस उपक्रम से लाभान्वित महिलाओं का बौद्धिक विकास होता है और वे गुट के विस्तार के लिए अधिक सक्रियता से भाग लेती है। अब "स्वयं सहायता गुट योजना", ग्रामीण, अशिक्षित एवं वनवासी महिलाओं को भी उनके परिश्रम का प्रतिफल का सफल उपक्रम बन चूका है।

तिरपराप्पु में सेवा भारती द्वारा स्थापित स्वयं सहायता गुट, अपने व्यवहार से सामाजिक समरसता का एक आदर्श उदाहरण बन गया है|

तिरपराप्पु में सेवा भारती द्वारा स्थापित स्वयं सहायता गुट में एक विशिष्ट जाति के अठारह और दूसरी जाति के दो सदस्य हैं। गांव के जातीय संगठन ने इन महिलाओं को सलाह दी कि वे दूसरी जाति की दो महिलाओं को उनके गुट से हटाकर अपना गुट बनाएं। लेकिन महिलाओं ने इस सुझाव को दृढ़ता से नकार दिया। इस पर संबंधित जातीय संगठन ने उन आठ महिलाओं को प्रस्ताव दिया कि यदि अलग जाति की उन दो महिलाओं को गुट से हटा दिया जाता है तो वे बदले इसके, स्वयं सहायता गुट को बिन ब्याज के एक लाख रुपये देंगे। लेकिन स्वयं सहायता गुट के सदस्यों ने जाति के आधार पर किसी तरह का भेदभाव करने से स्पष्ट इंकार करते हुए जातीय संगठन के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इस घटना के कारण राज्य में "स्वयं सहायता गुट" के महिलाओं के बीच सद्भाव की प्रक्रिया और गतिमान हो गईं।

स्वयं सहायता गुट के संचालन करनेवाले अन्य संगठनों से सेवा भारती की यही विशेषता है की, यह संगठन आर्थिक स्वावलंबन के इस माध्यम से सामाजिक समरसता का माहौल बनाने का उद्देश्य ओझल नही होने देता|

 

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सेवा भारती, तमिलनाडु
रजिस्टर्ड ऑफिस,
79, अलगप्पा रोड, पुरासवल्कम्
चेन्नई  60 00 84

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