स्वामी विवेकानन्द मेडिकल मिशन, वायनाड

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स्रोत: Seva-Hindi      तारीख: 23 Mar 2013 15:50:51

स्वामी विवेकानन्द मेडिकल मिशन, वायनाड, केरलकेरल प्रांत के वायनाड जिले के अविकसित, पहाड़ी, वनवासी क्षेत्र में आदिम समाज की 18 जनजातियां, खासतर कट्टुनैका जाति के लोग यहां रहते हैं। जमीन की खरीदी-विक्री के व्यापारिक दावपेच से ये भोलेभाले वनवासी अनभिज्ञ थे। यही कारण था कि इनकी भूमि अन्य लोगों ने बड़ी चालाकी से हड़प लीं। इस छल ने इन वनवासियों को गरीब और लाचार बना दिया। अपनी जमीन होते हुए भी वे उसपर फसल नहीं उगा पाते। फलत: इस हालात से वे अब कभी भी बाहर नहीं निकल पाएंगे ये सोचकर उनका जीवन और भी कठिन हो गया।

इन उपेक्षित लोगों की मदत करके उन्हें इस अवस्था से बाहर निकालना यह स्वामी विवेकानन्द मेडिकल मिशन प्रकल्प का प्रथम उद्देश्य बन गया और उस दिशा से मिशन के कार्यकर्ताओं ने अपना काम शुरू कर दिया। अब इन वनवासियों का जीवन और भी सरल एवं सहज हो गया। 
स्वामी विवेकानन्द मेडिकल मिशन प्रकल्प की स्थापना 1972 में हुईं। मिशन के कार्यकर्ताओं ने इन भोले-भाले लोगों को व्यापार की दृष्टि से प्रशिक्षित किया। उन्हें अपने अधिकार हनन के विरुद्ध लड़ने का साहस प्रदान किया। उनके मन में कुशल जीवनयापन का आत्मविश्वास जगाया। इसके साथ-साथ उनके स्वास्थ को ध्यान में रखते हुए मुत्तिल गांव में नि:शुल्क चिकित्सा केंद्र खोलकर मिशन का कार्य प्रारंभ किया।

अब यहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त 30 बेड का अस्पताल शुरू किया गया है। तीन पूर्णकालिक निवासी वैद्यकीय अधिकारी, नियमित सेवा देनेवाले दस विशेषज्ञ डॉक्टर्स, 15 अवैद्यकीय, 10 सहायक एवं सेवा भारती के अनेक कार्यकर्ता यहां कार्यरत हैं। अधिकांश कार्यकर्ता वनवासी क्षेत्र के हैं। उन्हें यथावश्यक प्रशिक्षण देकर इस कार्य के लिए सक्षम बनाया जाता है। 1993 में यहां केवल 5,321 रोगियों का उपचार किया गया, 2002 में 8,967 रोगियों का इलाज किया गया। सन 1980 में रा. स्व. संघ के तृतीय सरसंघचालक बालासाहब देवरसजी द्वारा नागपुर के सेवाव्रती डॉ. डी. डी. सगदेवजी को इस अस्पताल में विशेषरूप से भेजा गया। इससे अस्पताल का विविधांगी विकास हुआ।

इसके अतिरिक्त मिशन द्वारा और भी विविध उपक्रम चलाए जाते हैं।

1. सिकल सेल ऍनिमिया : यहां के वनवासी लोगों में 'सिकल सेल ऍनिमिया' नामक जानलेवा बीमारी अधिक मात्रा में दिखाई देती है। ऐसा ज्ञात होने पर, दिल्ली की अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्था (एम्स) के सहयोग से मिशन ने एक प्रकल्प की नींव रखी, जिसके अंतर्गत समस्त वनवासी बंधुओं का विधिवत् जांच किया गया। इसमें जो रोगी पाए गए उनका उपचार किया गया। चिकित्सा के बाद वैद्यकीय सलाह और अनुवर्ति देखभाल (फालो-अप) की व्यवस्था की गई।
2. सिकल सेल बीमारी के अलावा इन वनवासियों में क्षयरोग का प्रमाण अधिक मात्रा में दिखाई देता है। अतः इस दिशा मिशन ने अच्छा काम किया है। भारत सरकार के राष्ट्रीय क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत संस्था को निरीक्षक (मॉनिटर) का दायित्व सौंपा गया है। संस्था को उसके प्रभावी कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान करके सन्मानित भी किया गया है।
3. कोझीकोड (कालिकट) के वैद्यकीय महाविद्यालय के सहयोग से कर्करोगियों के  (कॅन्सर पेशन्ट्स) लिए दु:खशामक / निवारक स्वास्थ्य चिकित्सा केंद्र चलाया जाता है। इस केंद्र के माध्यम से कुछ रोगियों के घर में जाकर भी उपचार करने की व्यवस्था की जाती है।

4. चल चिकित्सालय के माध्यम से बस्ती में उपचार करने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा चल चिकित्सालय, शिशु व प्राथमिक विद्यालय तथा वनवासी छात्रावासों के सभी छात्रों का समय-समय पर वैद्यकीय जांच समय-समय पर की जाती है। चार वनवासी बहुल स्थानों पर वैद्यकीय उपकेंद्र खोले गए हैं। यहां सप्ताह में एक बार रोगनिदान तथा रुग्णोपचार किए जाते हैं। 2002 में ही वायनाड जिले के विभिन्न स्थानों में 430 स्वास्थ्य चिकित्सा शिविर लगाए गए। गंभीर अवस्था के रोगियों को संस्था अपनी व्यवस्था से तुरंत मुत्तिल के अस्पताल ले जाकर उपचार करती है। 
5. स्वास्थ्य मित्र : ‘सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा’ कार्यक्रम के अंतर्गत यह उपक्रम चलाया जाता है। अब तक 150 वनवासी कार्यकर्ताओं को मिशन ने प्रशिक्षित किया है। स्वास्थ मित्र उनके अपने प्रस्तावित कार्यक्षेत्र में नियमित प्रवास करते हैं। गांव के रोगियों को प्राथमिक उपचार करना तथा दृश्य-श्राव्य माध्यमों, साहित्य, छायाचित्र इत्यादि के प्रयोग से स्वास्थ्य शिक्षा देना यह स्वास्थ्य मित्रों का दायित्व है।

6. सामाजिक सेवाकार्य / शिक्षाकार्य : मिशन के द्वारा 6 ग्रामीण विद्यालय, 15 बाल संस्कार केंद्र, 11 ग्राम सेवा समितियां संचालित की जाती है। दो गांवों में पेयजल का प्रबंध तथा अन्य दो गांवों में स्वच्छता गृहों का निर्माण भी किया गया है।

7. सिलाई प्रशिक्षण केंद्र चलाकर अब तक 60 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। 
8.  सिकल सेल ऍनिमिया व्याधि से ग्रस्त रोगी अत्यंत दुर्बल हो जाते हैं। उनके आर्थिक पुनर्वसन के लिए दो प्रशिक्षण केंद्र चलाए जाते हैं; जिसमें बांस और बेंत की वस्तुएं तैयार की जाती है। कुल 90 रोगी इस केंद्र में लाभान्वित होते हैं।

1996 में स्वामी विवेकानन्द मेडिकल मिशन को ‘‘श्री गुरुजी पुरस्कार’’ देकर सम्मानित किया गया था।


सम्पर्क
स्वामी विवेकानन्द मेडिकल मिशन
विवेकानन्द नगर, मुत्तिल
पोस्ट : कालपेट्टा दक्षिण, जिला : वायनाड
पिन : 67 31 22
(केरल, भारत)
दूरभाष : 04936 202528, 204360
-मेल : [email protected]
वेब साईटwww.svmm.org

कैसे पहुंचे ? 
हवाई मार्ग : वायनाड से समीपतम हवाई अड्डा कोझीकोड का कारिपुर है। यह वायनाड से 100 कि.मी. दूरी पर है। भारत के सभी प्रमुख शहरों से यहां के लिए हवाई सेवा उपलब्ध है। वायनाड से 265 कि.मी. दूर कोचिन आंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है।

रेल मार्ग : वायनाड से 110 कि.मी. दूर कोझीकोड यह समीपतम रेल्वे स्टेशन है। भारत के सभी प्रमुख शहरों से यहां के स्टेशन पर  रेल गाडियां आती हैं।

सड़क मार्ग वायनाड सें मुत्तिल 21 कि.मी. दूर है। वायनाड के लिए विविध शहरों से सड़क मार्ग जुडा है। विशेषत: राष्ट्रीय महामार्ग नं. 212 और राज्य महामार्ग 17 से हम सुलभता से वायनाड पहुंच सकते हैं। बंगलुरु से भी वायनाड के लिए बस सेवा उपलब्ध है।

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