आम्बेडकर नगर में सेवा विद्या मंदिर द्वारा अनूठी शिक्षा

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स्रोत: Seva-Hindi      तारीख: 25 Mar 2013 15:34:01

Sewa Vidya Mandir Dakshinpuri, Delhiदक्षिण दिल्ली में आम्बेडकर नगर के पास बसी दक्षिणपुरी, मूलत: पुनर्वास कॉलनी है। लगभग तीस वर्ष पूर्व कुछ सेवा बस्तियों के लोगों को सरकार ने यहां बसाया था। कॉलनी की स्थापना के कुछ वर्ष बाद ही यहां सेवा भारती का केन्द्र शुरू हुआ। कुछ ही समय बाद बस्ती में केन्द्र के उपक्रमों का प्रभाव दिखने लगा। 

आज यहां बालवाडी, बाल संस्कार केन्द्र, टंकन (टायपिंग) प्रशिक्षण के साथ पहली से पांचवीं तक बच्चों के शिक्षा की व्यवस्था आरंभ की गई; और इसका नाम रखा गया ‘सेवा विद्या मंदिर'। अब तक यहां दो हजार से अधिक बच्चे प्राथमिक शिक्षा प्राप्त चुके हैं और दो सौ चालीस बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। यहां दो सत्रों में पढ़ाई होती है। प्रथम सत्र में नर्सरी से पांचवीं तक और द्वितीय सत्र में नर्सरी से चौथी कक्षा तक बच्चे पढ़ते हैं। 
इस बस्ती में प्रवेश करते ही इस केन्द्र की शिक्षा के अनूठे संस्कारों का प्रमाण मिलता है। यहां के बच्चे बड़ों का आदर करते हैं।

सेवा विद्या मंदिर की शिक्षिका का कहना है, ‘‘सदाचार ही यहां की विशेषता है। बच्चों को संस्कारवान बनाने के साथ-साथ ऐसी शिक्षा दी जाती है कि वे जीवनभर सेवा भारती के आदर्शों को याद रखते हैं। वे जहां भी पढ़ने जाते हैं, वहां उनकी अलग पहचान होती है।

यहां के बच्चों के अभिभावक यहां की शिक्षा से बहुत ही संतुष्ट है। मदनगीर में रहनेवाली एक अभिभावक कहा, ‘‘मेरा पुत्र जब से यहां पढ़ने आ रहा है तब से घर के हर सदस्य को दिन में एक बार पैर छूकर प्रणाम करता है। ऐसी शिक्षा किसी प्रायव्हेट स्कूल में नहीं मिल सकती।"

दक्षिणपुरी के एच.एच.ब्लॉक में रहनेवाली एक वृद्धा अभिभावक ने बताया, ‘‘बच्चों को यहां पढ़ाने से घर में उन्हें यह बताने की आवश्यकता नहीं होती कि भोजन के पहले हाथ-मुँह धो लो, क्योंकि बच्चे इस तरह की दैनंदिन व्यवहार की बातें यहां सीखते हैं।"

उन्होंने यह भी बताया कि, ‘‘उनकी बहू अब इस दुनिया में नहीं है। बेटा दूसरी शादी करके अलग रहता है, किंतु पोतियों को मैं अपने पास ही रखती हूँ। मुझे पूरा विश्‍वास है कि सेवा भारती के सहयोग से मेरी पोतियां अच्छी तरह से पढ़-लिख सकेंगी।"  इस तरह की अद्भुत विश्वसनीयता सेवा भारती के इस केंद्र को प्राप्त हुई है।

केन्द्र के बिल्कुल समीप रहनेवाली हमीदा का कहना है, ‘‘इस शाला में पहले मेरा पोता पढ़ता था। अब तीन नाती पढ़ रहे हैं। सभी को गायत्री मंत्र याद है। सभी शिक्षिकाएं मेरी बड़ी इज्जत करती हैं और कई बार हमारे घर भी आती हैं। इस केन्द्र के बच्चों और कार्यकर्ताओं से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगता है।" 

बस्ती की एक अन्य वृद्धा अभिभावक कहती है, ‘‘मेरा नाती देवेन्द्र विद्या मंदिर में पढ़ता है। वह अन्य बच्चों की तरह किसी को गाली नहीं देता और न ही किसी से अशिष्टता से पेश आता है। जबकि हमारे पड़ोस में रहनेवाले बच्चे, जो कि अन्य विद्यालय में पढ़ते हैं, उनके मुँह से बात-बात में गाली निकलती है। यही कारण है कि मैं अपने नाती को इस केन्द्र में पढ़ने भेजती हूँ।"

इसी बस्ती की पूनम देवी ने बताया, ‘‘हमारे तीन बच्चे विद्या मंदिर में पढ़ते हैं। जब से वे यहां पढ़ रहे हैं उनका आपस में नहीं झगड़ते। ऐसा इस शाला के संस्कारों के कारण ही संभव हुआ है।"

एक और शिक्षिका कहती है, "मैं तीन वर्षों से यहां अध्यापन कर रही हूँ। यहां के बच्चों एवं अन्य कार्यकर्ताओं का व्यवहार इतना अच्छा है कि और किसी शाला में नौकरी करने की इच्छा ही नहीं होती। यदि सरकारी नौकरी लग जाए तो भी यहां से नहीं जाउंगी, यहीं रहूंगी।"

शिक्षिका प्रतिभा यहां गत सात  वर्षों से पढ़ा रही है। उनका कहना है, ‘‘यहां सेवा करने से समाज में एक अलग पहचान रहती है और मन को भी लगता है कि समाज के लिए कुछ तो कर रही हूँ।" 

केन्द्र में सिलाई के साथ ही टायपिंग भी सिखाया जाता है। अब तक सैकड़ों लड़कियां यहां सिलाई का प्रशिक्षण ले चुकीं हैं। इस समय यहां छह बहनें सिलाई डिप्लोमा और पंद्रह बहनें नर्सिंग डिप्लोमा का कोर्स कर रही हैं।

इस विद्या मंदिर के लिए सेवा भारती ने जमीन खरीदकर भवन बनाया है। चार मंजिल के  इस भवन में कुल आठ कमरे और एक सभागृह है। 26 शिक्षिकाएं यहां सेवा दे रहीं हैं। समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ताओं द्वारा प्रांरभ किया गया यह विद्या मंदिर आज एक ऐसी युवा पीढ़ी को तैयार करने में लगा है, जो आगे चलकर 'मैं' नहीं, 'हम' की भावना से काम करेंगे। जिस समाज में ‘हम’ की भावना आ जाती है, वह समाज निश्चित रूप से आदर्श बनता है, प्रगति करता है और शेष समाज के लिए पथ-प्रदर्शक का काम करता है।

 

संपर्क 
सेवा विद्या मंदिर
डी - 79 दक्षिणपुरी, 
नई दिल्ली – 11 00 62

दूरभाष : 011- 29053944