अरुण ज्योति का ‘विवेक-स्पर्श’

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स्रोत: Seva-Hindi      तारीख: 06 Mar 2013 17:22:29

अरुण-ज्योति प्रकल्पभारत एक ऐसा देश है जिसने प्रत्येक राज्य सांस्कृतिक, धार्मिक तथा भौगोलिक विविधता को संघराज्य के एक सूत्र में बड़ी विशेषता से पिरोए रखा है। इस दृष्टि से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में से एक 'अरुणाचल प्रदेश' भी अपनी अलग पहचान रखता है।

समूचा अरुणाचल प्रदेश स्वयंपूर्ण, आत्मनिर्भर और अपनेआप में ही अद्वितीय है। परन्तु सामाजिक और नगरीय जीवन में एक आदर्श स्थापित करने वाले इस राज्य की वर्तमान में एक समस्या है कि आधुनिक जीवन पद्धति की शिक्षा देने पहुंचे ईसाई मिशनरियों के चंगुल में फंसकर वह अपनी धरोहर खोता जा रहा है।

इस बात से व्यथित होकर तत्कालीन लेफ्टिनेंट गव्हर्नर के. ए. ए. राजा ने स्वामी विवेकानन्दजी के विचारों की सीख के अनुसार सामाजिक कार्यों में अग्रेसर विवेकानन्द केंद्र के संस्थापक एकनाथ जी रानडे को अरुणाचल प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा सुविधा उपलब्ध कराने का काम सौंपने का निश्चय कर उन्हें आमंत्रित किया। एकनाथ जी ने अरुणाचल प्रदेश की सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर की बुनियाद पर आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने के इस कार्य को स्वीकार किया। यह काम इतना तेजी से बढ़ता गया कि 1974 में विवेकानन्द केंद्र ने यहां प्रत्यक्ष काम शुरू किया और तीन साल में ही राज्य में विवेकानन्द केंद्र के सात विद्यालय खुल गए।

‘संस्कृति के साथ विकास’ इस विचार पर केन्द्रित शिक्षा प्रणाली के अनुसार विवेकानन्द केंद्र ने अरुणाचल प्रदेश के लिए एक विस्तृत सामाजिक कार्यक्रम- ‘अरुण-ज्योति प्रकल्प' तैयार कर उस पर काम करना शुरू किया। इस प्रकल्प के अंतर्गत 1) अनौपचारिक शिक्षा मंच, 2) स्वास्थ्य सेवा मंच, 3 ) युवा मंच, 4) महिला मंच और 5) सांस्कृतिक मंच, का गठन किया गया और इस ‘अरुण-ज्योति’ के सहारे इस राज्य ने आज विकास के मार्ग पर चलना सीखा है।

1) अनौपचारिक शिक्षा मंच- समाज के एकदम निचले स्तर से लेकर सभी के लिए शिक्षा का एक लुभावना वातावरण निर्माण करने के दृष्टिकोण से इस मंच की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही शिक्षा अधूरी छोड़ने वालों का प्रमाण कम करने के लिए सार्थक प्रयत्न, शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों में अनुशासन लाना, विद्यार्थियों को बुरी आदतों से दूर रखना, उनकी बुरी आदतें छुड़ाना और इस दृष्टि से उनके अभिभावकों में जागरुकता निर्माण करना। इसके लिए उचित वातावरण का निर्माण करना, इस प्रकार का बहुआयामी कार्यक्रम सामने रखकर इस मंच की रचना की गई।

इसके अंतर्गत कक्षा 3 से 5 के छात्रों के लिए ‘आनंदालय’ शुरू किये गए, जिसमें ‘खेल-खेल में शिक्षा’ इस आधार पर पाठ्यक्रम बनाया गया है। इस मंच के अंतर्गत बालवाडी में कार्यरत सेविकाओं और आनंदालय के आचार्यों का नियमित रूप से प्रतिमाह प्रशिक्षण होता है। इससे उनका आत्मविश्‍वास तो बढ़ता ही है, साथ ही उनके व्यक्तित्व में भी निखार आता है। यहां शिक्षा के क्षेत्र में पुरुष और महिलाओं में बड़ा ही असन्तुलन दिखाई देता है। इस बात को ध्यान में रखकर मंच के माध्यम से अरुणाचल के तिराप जिले के लाजो क्षेत्र में महिला शिक्षा का विशेष अभियान चलाया गया, इससे यहां महिला-शिक्षा का प्रमाण बढ़ रहा है। इस मंच को एक मोबाइल लायब्ररी भी उपलब्ध कराई गयी है। यह लायब्ररी पुस्तकों के साथ ही दृक् -श्राव्य साधनों से परिपूर्ण है।

2) स्वास्थ्य-सेवा मंच- अरुणाचल के ग्रामीण और दूर-दराज इलाकों में रहने वाले लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागृती लाने के लिए इस मंच का गठन किया गया है। इस मंच में सेवाव्रती कार्यकर्ताओं को स्वास्थ्य सेवा की दृष्टि से प्रशिक्षित किया जाता है। ये सेवाव्रती गांव-गांव में घूमकर लोगों को स्वास्थ्य विषयक जानकारी देते हैं। जगह-जगह मेडिकल चेकअप कैम्प लगाये जाते हैं। जिसके द्वारा परम्परागत रोग-प्रतिबंधात्मक उपायों के साथ ही आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के बारे में जानकारी दी जाती है। लसीकरण कार्यक्रमों में भी इन स्वास्थ्य रक्षकों की मदत ली जाती है। स्वास्थ्य-सेवा मंच के प्रयत्नों से यहां के निवासी अब स्वच्छता व स्वास्थ्य रक्षा के उपायों का महत्त्व जानने लगे हैं।

3) युवा मंच- इस मंच के माध्यम से अरुणाचल के युवाओं के भीतर व्याप्त कलागुणों के माध्यम से उनमें राष्ट्रभाव का जागरण किया जाता है। सामाजिक विकास तथा सांस्कृतिक एकात्मता के लिए मंच द्वारा समय-समय पर विविध प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम लिए जाते हैं। इस दृष्टि से देश के विभिन्न राज्यों में कार्यरत विवेकानन्द केंद्र की शाखाओं द्वारा 'अरुणाचल बंधु परिवार यात्रा' का भी आयोजन किया जाता है। परशुराम कुम्भ मेले के दौरान मंच के कार्यकर्ता मेले की व्यवस्था में सहभागी होते हैं तथा यहां आए भक्तों की सेवा में हाथ बटाते हैं।

4) महिला मंच- महिलाओं को सक्षम बनाने के उद्देश्य से इस मंच का गठन किया गया है। यह मंच महिलाओं के स्वावलंबन के लिए विविध प्रकार के प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन करता है। स्वयं सहायता की दृष्टि से उन महिलाओं के गुट बनाये जाते है। महिलाओं को स्थानीय कला और गालिचा (कार्पेट) बुनाई का प्रशिक्षण देने के लिये पश्चिम कामेंग जिले के सेईजोस्सा तथा लोहित जिले के वाक्रो गांव में दो निवासी प्रशिक्षण केंद्र चलाये जाते हैं। यही कार्पेट बुनाई आज इस राज्य की प्रमुख विशेषता बन गई है।

5) सांस्कृतिक मंच- अरुणाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विशेषता को बनाये रखने के लिए प्रदेश के विद्वतजनों, साहित्यकारों तथा कलाकारों को एकत्रित करने का अद्वितीय कार्य इस मंच ने किया है। संस्कृति संवर्धन के लिए प्रबुद्धजनों का 'सामूहिक विमर्श कार्यक्रम' एक प्रभावी माध्यम सिद्ध हुआ है। इस मंच द्वारा राज्य में विविध संगठनों की सहायता से इस प्रकार के अनेक कार्यक्रमों का आयोजन नियमित रूप से किया जाता है।
विवेकानन्द केन्द्र इन कार्यक्रमों के माध्यम से अरुणाचल की सांस्कृतिक धरोहर का पोषण कर रहा है। ‘अरुण-ज्योति’ अब अरुणाचल के विकास पथ का प्रेरणापुंज बन गया है।

सम्पर्क
1. विवेकानन्द केन्द्र विद्यालय
अरुणाचल प्रदेश ट्रस्ट
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रिव्हर साईड, गूड्स स्ट्रीट
दिब्रुगढ़ 78 60 01
(असम, भारत)
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फैक्स : +91-(0)373-2321293
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2. विवेकानन्द केन्द्र अरुण ज्योति प्रोजेक्ट
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तिनसुखिया 78 61 25
(असम, भारत)
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