एकल का कौटिल्य

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स्रोत: Seva-Hindi      तारीख: 21 Apr 2014 17:10:55

अमरेन्द्र विष्णुपुरी

एकल विद्यालय से पढ़े हुए छात्रों की प्रतिभा कौटिल्य की भांति कुशाग्र होता दिखाई पड़ रहा है। ऐसी प्रत्यक्ष अनुभूति तक हुई जब झारखण्ड प्रदेश की राजधानी रांची से लगभग 65 किलोमीटर पूरब अवस्थित सिल्ली प्रखण्ड के ग्राम सालीसेरंग एकल विद्यालय में जाना हुआ। साधारण सा दिखने वाला श्याम वर्ण के बालक में छुपी हुई असाधारण प्रतिभा से तब परिचय हुआ, जब पुछे गए प्रश्नों के उत्तर वह धारा प्रवाह ओजस्वी वाणी में दिया।

पूछे गए प्रश्न न तो उनके पाठ्यपुस्तक से थे न तो उसकी आयु व कक्षा से मेल खाते थे। उसके चेहरे को देखकर प्रश्न पूछने में भी यह संशय बना रहता था कि क्या वह अमूक प्रश्न का उत्तर दे पाने में सक्षम हो पायेगा किन्तु आश्चर्य तो तब होता था जब इस प्रकार के जटील प्रश्न को पूछते ही बालक के उत्तर प्रस्तुत हो जाते थे।


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सिल्ली प्रखण्ड के सालीसेरंग गाँव का उस (विद्यालय कोड - BHJH04221001) बालक का नाम है प्रदीप कुमार महतो। लगभग 13 वर्षीय प्रदीप जब पाँच साल का शिशु था तब अपने गाँव के एकल विद्यालय में खेल एवं पढ़ाई के नाम से प्रवेश किया। अंक ज्ञान वर्ण माला ज्ञान शब्द ज्ञान, सामान्य ज्ञान विज्ञान से अवगत होना शुरू हुआ। संयोग की बात यह है कि इस एकल विद्यालय के तत्कालीन आचार्य शिशु प्रदीप के पिता श्री रामकृष्ण महतो जी थे। वर्ष 2006 से वर्ष 2009 तक सालीसेरंग ग्राम के एकल विद्यालय में आचार्य रहे। गाँव के 30-35 विद्यार्थी को एकल विद्यालय में पढ़ाते थे, उसी में से एक विद्यार्थी आचार्य श्री रामकृष्ण जी का पुत्र प्रदीप भी था। बचपन से ही आचार्य जी के बालक प्रदीप में प्रतिभा का दृष्टिगोचर वर्ष 2006 -2007 में राँची में एकल विद्यालय महिला विभाग का कार्यक्रम जैन स्मृति भवन में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में राँची के आस पास चलने वाले एकल विद्यालय के बच्चों के द्वारा कार्यक्रम प्रस्तुत करने की योजना बनीं। संयोग से सालिसेरंग ग्राम के एकल विद्यालय के बच्चों को भी बुलाया गया। वनबन्धु परिषद् राँची द्वारा इन बच्चों का कार्यक्रम भी प्रस्तुत हुआ। कार्यक्रम प्रस्तुती में सालिसेरंग ग्राम के एकल विद्यालय में पढ़ने वाला बालक प्रदीप महतो भी शामिल था। इसने अपनी विलक्षण प्रतिभा के माध्यम से उपस्थित नगरीय समाज को प्रभावित किया। कार्यक्रम में मौके पर अतिथि के रूप में उपस्थित तत्कालीन राज्य सभा सांसद श्री अजय मारू ने एकल विद्यालय में पढ़ रहे प्रदीप की प्रतिभा को विकसित करने हेतु आगे की पढ़ाई के लिए आर्थिक सहयोग करने की तत् क्षण घोषणा कर दी। वर्ष 2008 से अब तक श्री अजय मारू जी द्वारा प्रदीप को प्रतिमाह पाँच सौ की राशि उसकी पढ़ाई हेतु उसके खाते में प्रदान किया जा रहा है जिससे वह आगे की पढ़ाई जारी रखा है। इतना ही नहीं अपनी प्रतिभा की सुरभी अनेक सामाजिक सांस्कृतिक व शैक्षणिक संस्थाओं में परिलक्षित करता रहता है। अभी वह श्री अजय मारू के प्रयास से ही सिल्ली में आर. टी. सी. विद्यालय मुरी में कक्षा चतुर्थ का विद्यार्थी है। प्रदीप का सम्पर्क अभी भी साली से रंग एकल विद्यालय से जुड़ा है। एकल विद्यालय में आता है एवं पढ़ता है।

पूछे गए दर्जनों सवाल में पंच किसे कहते है, सरपंच कौन होता है, ग्राम पंचायत किसके अधीन काम करती है, सिल्ली प्रखण्ड में कितने गाँव है, झारखण्ड राज्य का नाम झारखण्ड क्यों पड़ा? झारखण्ड में कितने जिले हैं? उसका नाम क्या है? बिहार में कितने जिले हैं ? उसका नाम क्या है? पश्चिम बंगाल में कितने जिले हैं ? उसका नाम क्या है? भारत देश का क्षेत्रफल क्या है? विश्व में कितने देश हैं? उसका नाम क्या है? महाभारत के युद्ध के बारे में क्या जानते हैं? रामायण में कितने चैपाई हैं? भारत का संविधान बनाने में कितने दिन लगा?महात्मा गाँधी के बारे में क्या जानते हैं? गठबन्धन सरकार, क्या होता है? सरकार कैसी होनी चाहिए?

एकल का पूर्ववती छात्र प्रदीप के पिता 47 वर्षीय श्री राम-कृष्ण महतो भी एकल का पूर्व आचार्य बन गया। अब ये आर. टी. सी. विद्यालय मुरी में छात्रावास प्रमुख बन कर विद्यालय में कार्यरत है। गौरतलब यह है कि प्रदीप जब एकल विद्यालय में पढ़ता था तो इनके पिता एकल विद्यालय का आचार्य थे अब प्रदीप आर. टी. सी. विद्यालय में पढ़ता है तो प्रदीप के पिता उसी विद्यालय में छात्रावास प्रमुख है।

अमरेन्द्र विष्णुपुरी

दूरभाष ०९४३१११८९८९ इमेल a[email protected]

केन्द्रीय संयुक्त संगठन मंत्री

एकल संस्थान