सेवाभारती एवं समरसता मंच द्वारा डॉ.बी.आर.आम्बेडकर समरसता गोष्ठी संपन्न

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स्रोत: Seva-Hindi      तारीख: 23 Apr 2015 11:15:55

आगरा, अप्रैल 22 : देश में वर्षों से जातियों, उपजातियों व वर्ग विशेष के बीच भेद व छुआछूत के कारण राष्ट्र का अहित हुआ है। बाबा साहब भीमराव आम्बेडकर ने इस दोष के लिए सतत संघर्ष किया। नौकरी छोड़कर अपना समूचा जीवन समाज के लिए समर्पित कर दिया। हालांकि परिवार में गरीबी की किल्लत थी और अभावों के कारण परिवार ने अनेकों परेशानियों को झेला, लेकिन बाबा साहब अंबेडकर डिगे नहीं और समाज सुधार के कार्य को आगे बढ़ाया। उनका मत था जो जितना जातिवादी, उतना ही कम राष्ट्रवादी है। उन्होंने अस्पृश्यता को प्रचंड समस्या बताया। बाबा साहब ने दैनंदिन परेशानियों से जूझते हुए सतत परिश्रम व संघर्ष के साथ पढ़ाई की और भारतीय संविधान को साकार किया। उक्त विचार सेवा भारती एवं सामाजिक समरसता मंच के तत्वावधान में यूथ हास्टल, संजय प्लेस आगरा में डॉ.भीमराव आम्बेडकर समरसता गोष्ठी मुख्य वक्ता के रूप् में चिंतक एवं समाजसेवी तथा मेरठ प्रांत के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार प्रमुख अजय मित्तल ने व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि बाबा साहब आम्बेडकर ने देखा कि अन्य धर्मों में हिंदुओं से अधिक भेदभाव है। रोटी-बेटी के संबंध नहीं हैं और धर्मांतरण के बाद भी वे वहां वंचित रहते हैं। तब उन्होंने भगवान बौद्ध के विचारों और संदेशों को कसौटी पर कसा और हिंदू धर्म के बौद्ध धर्म को वरीयता दी। स्वराज्य के संघर्ष से अधिक जातिविहीन समाज बनकर उसे संगठित करने की आवश्यकता पर बल दिया। सामाजिक एकता और भाईचारे के लिए उन्होंने संदेश दिया कि छुआछूत, रोटी, सिंधुवादी, वेदबंदी, बेटीबंदी, व्यवसायबंदी, के प्रति आग्रह, राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक बताया। उनका कहना था कि भूलवश एकबार जो चला गया उसके वापसी के दरबाजे बंद नहीं होना चाहिए।

प्रारंभ में अशोक अग्रवाल ने गोष्टी के विषय की भूमिका के सम्बन्ध में बताया कि आज समरसता की आवश्यकता है। ऊंच-नीच और अस्पृश्यता का विचार हमारे शास्त्रों में नहीं है। जब-जब हम साथ हुए शुभ ही हुआ जैसे ही विरक्त हुए कष्टों को झेला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग कार्यवाह केशव शर्मा ने कहा कि डॉ.आम्बेडकर ने पीड़ा सही किंतु तपस्या के बल पर देश की एकता को अंजाम दिया।

इस अवसर पर दिल्ली से प्रकाशित होनेवाले पांचजन्य के डॉ.भीमराव आम्बेडकर अंक का लोकार्पण किया गया। गुरू का ताल गुरूद्वारा के बाबा हरवंश सिंह ने गुरूनानक और गुरूवाणी के संदेश, पंगत और संगत के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यही बाबा साहब की शिक्षा भी है। सामाजिक समरसता मंच के संयोजक इंजीनियर आरबी सिंह ने कहा कि देश के महापुरूषों ने भेदभाव, ऊंच-नीच की भावना दूर करने के लिए इस मंच की स्थापना की। बाबा साहब आम्बेडकर, डॉ.हेडगेबार, माधवराव सदाशिव गोलवलकर गुरूजी, भाउराव देवरस जैसे मनीषियों ने स्पष्ट कहा कि यह कलंक मिटना ही चाहिए। समाज के उत्थान के लिए, विषमता दूर करने के लिए, वंचितों के बीच उनके महापुरूषों के कार्यों और संदेश के लिए सामाजिक समरता जरूरी है।

इस अवसर पर बौद्ध मत के भंते ज्ञानरत्नजी ने कहा कि बाबा साहब देश ही नहीं बल्कि विश्व के मसीहा थे। जिन्होंने भेदभाव, अस्पृश्यता के कलंक को मिटाने का कार्य किया। देश के कल्याण के लिए संविधान बनाया। आज के नेताओं की नीत में खोट है। सही मायने में संरक्षण किया जाए और उसका उपयोग किया जाए। कार्यक्रम का संचालन अशोक शर्मा और राजेंद्रजी ने किया।