स्वावलंबन

सेवा भारती, तमिलनाडु का ‘तिरपराप्पु’ स्वयं सहायता गुट

तिरपराप्पु में सेवा भारती द्वारा स्थापित स्वयं सहायता गुट, अपने व्यवहार से सामाजिक समरसता का एक आदर्श उदाहरण बन गया है|..

कबीर नगर का सिलाई केन्द्र

कबीर नगर के इस केन्द्र में घरेलू सिलाई की शिक्षा दी जाती है तथा नैशनल ओपन स्कूल का डिप्लोमा कोर्स भी यहां उपलब्ध है। सेवा भारती का भी अलग डिप्लोमा है। इस प्रशिक्षण के अतिरिक्त "मेंहदी के डिज़ाइन" का भी प्रशिक्षण दिया जाता है।..

सेवा भारती ने किया शांति, कलारानी, अनीता का पुनर्वसन

सेवा भारती तमिलनाडु ने स्वयं सहायता गुट के माध्यम से शांति, कलारानी, अनीता जैसे अनेक निराश्रित और संकटग्रस्त महिलाओंका पुनर्वसन किया है|..

‘जनभारती’ द्वारा गो-केंद्रित खेती का आर्थिक सफल प्रयोग

किसान समस्याग्रस्त होने से गॉंव की व्यवस्था अस्तव्यस्त हो गई. उस समय, कोल्हापुर के ‘जनभारती न्यास’ ने उन्हें एक आसान उपाय- हर घर में कम से कम एक देसी गाय पालना- बताया...

सत्कर्म श्रद्धाश्रय : पनवेल रायगढ़

कस्तुरी के खोज में भटकने वाले कस्तुरी मृग के समान वनवासी बंधुओं का, उनके अंगभूत गुण और कुशलता का परिचय करा देने का महत्कार्य ‘सत्कर्म श्रद्धाश्रय’ इस संस्था ने किया है...

वनवासियों के जीवन में मधुरस घोलती प्रगति संस्था मेळघाट

बदलती जीवनशैली के कारण मेलघाट के वनवासी रोजगार की तलाश में शहरों की ओर जाने लगे है|उन्हें वनक्षेत्र में ही रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा मे प्रगति संस्था काम कर रही है| ..

भगिनी निवेदिता प्रतिष्ठान के महिला रोजगार प्रशिक्षण वर्ग

पुणे में भगिनी निवेदिता प्रतिष्ठान ने महिलाओं के व्यवसायिक प्रशिक्षण के लिए वर्ग आरंभ किए है| इन वर्गो की उपयोगिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि, अब तक इन वर्गो में प्रशिक्षित साडे आठ हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला है|..

डुमरिया (झारखण्ड) स्वावलंबन की ओर

झारखंड के साहेबगंज जिले के दूर-दराज पाखुडिया प्रखंड में वनवासी कल्याण केंद्र के माध्यम से और महिलाओं के स्वयं सहायता समूह द्वारा विकास के बीज बोए गए हैं| परिणाम स्वरूप आज पूरे इस संताली बहुल पाखुडिया प्रखंड में कुल २२ स्वयं सहायता समूह गॉंव के विकास का क..

हरिनाछापर (झारखंड) के विकास की ओर बढ़ते कदम

१९९४ को हरिनाछापर गॉंव में एकल विद्यालय आरंभ किया गया| फिर २००५ में इसगॉंव को ग्राम विकास के लिए चुना गया; और यहीं से गॉंव के कदम विकास की दिशा में तेजी से बढ़ने लगे| ..

महिलाओं ने किया ‘चरक पत्थली’ का विकास

पलामू जिले के दूर-दराज चरक पत्थली गांव में वनवासी कल्याण केंद्र ने वहॉं की अशिक्षित महिलाओं के माध्यम से विकास के बीज बोए हैं| परिणाम स्वरूप आज गॉंव में महिला और बच्चों में साक्षरता का अनुपात बढ रहा है|..

चाल्हो गॉंव : सहकारिता से स्वयंपूर्णता के पथ पर

झारखंड के वनवासी कल्याण केंद्र ने चाल्हो गॉंव के वनवासी भाइयों को असली सहकारिता की सीख दी और उन्हें खुद के साथ देश का विकास साधने की कला भी सिखाई है|..

अमेरा गॉंव आज बदल गया है

कुछ समय पहले तक छत्तीसगढ़ के पर्वतीय क्षेत्र में एक पिछड़े गॉंव के रूप में जाना जानेवाला अमेरा गॉंव आज, सेवा भारती द्वारा चलाए गए सेवा प्रकल्पों की बदौलत शिक्षा, आरोग्य और रोजगार के क्षेत्र में स्वयंपूर्ण बन गया है| उस समय, सामान्य सुविधाओं को तरसते यहॉं के..

भारत विकास परिषद की ‘वनवासी सहायता योजना’

दिल्ली की भारत विकास परिषद उनके ‘वनवासी सहायता योजना’ के अंतर्गत वनवासियों के आर्थिक उत्थान के लिए कार्य कर रही है|..

भारत विकास परिषद का विकलांग सहायता केन्द्र

अपंग व्यक्तियों को सामान्य जीवन व्यतीत करने योग्य बनाने के लिए भारत विकास परिषद ने दिल्ली में विकलांग केन्द्र की स्थापना कर काम आरंभ किया| आज संस्था के, देश के अलग-अलग राज्यों में कुल १३ सहायता केन्द्र चल रहे हैं|..

कृषि विकास के कार्य में डॉ. हेडगेवार सेवा समिती

डॉ. हेडगेवार सेवा समिती ने नंदुरबार जिले के वनवासियों का पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का अनोखा मिलाफ कर, उसे इन वनवासी गॉंवों के विकास शृंखला की एक कडी बनाया है|..

शबरी सेवा समिति द्वारा वनवासी महिलाओं का उत्थान

देश के किसान की हालत आज भी काफी शोचनीय बनी हुई है| खासकर दुर्गम भागों में बसे किसानों की स्थिती तो बहोत ही गंभीर है| महिलाओं की स्थिती तो और भी बदतर है| इस परिवेश में शबरी सेवा समिति ने इन महिलाओं के उत्थान के लिये कुछ दशकों से प्रभावी कार्य आरंभ किया हैं..

ग्रामीण विकास के लिए कटिबद्ध 'धरामित्र'

महाराष्ट्र राज्य के विदर्भ क्षेत्र में कृषि मुख्यत: बरसात के पानी पर निर्भर है| कृषि का बहुत बड़ा क्षेत्र सिंचन की सुविधा से परे है| यह स्थिति बदलने के लिए महाराष्ट्र के वर्धा जिले में ‘धरामित्र’ काम कर रहा है| धरामित्र अपनी योजनाओं में पर्यावरण के अनुरूप ..

संपूर्ण बांबू केंद्र, लवादा

दुर्गम प्रदेश में रहनेवाले वनवासियों का उत्थान, उनकी कला और उनके आसपास उपलब्ध संसाधनों के सहारे करते हुए उन्हें सिर्फ रोजगार ही नहीं; सन्मान्य जीवन जीने का मौका देने का प्रयास महाराष्ट्र के अमरावती जिले में मेळघाट स्थित ‘संपूर्ण बांबू केंद्र’ कर रहा है| ..

महिलाओं के लिए मार्गदर्शक ‘उद्योग वर्धिनी’ सोलापूर

सोलापूर के उद्योग वर्धिनी संस्था ने महिलाओं के लिए रोजगार के अनेक मार्ग खुले किए है| सोलापुर की चंद्रिका एस. चव्हाण ने इसकी नीव रखी|..

माता बालक उत्कर्ष प्रतिष्ठान का महिला सक्षमीकरण

स्वतंत्रता के बाद भी भारत की ग्रामीण महिलाओं का जीवन, मूलभूत सुविधाओं से वंचितही रहा है| इस उपर अंधश्रद्धा, दहेज जैसे कुप्रथाओ ने भी उन्हे घिर रखा है| इसी वातावरण में महाराष्ट्र के सोलापूर जिले में, सांगोला गॉंव की कुछ गृहिणीयों ने सामाजिक कार्य के रूप मे..

शेती परिवार कल्याण संस्था : पशुपालन को नई दिशा

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भेड़पालन की परांपरागत पद्धति अव्यवहारिक होने के कारण यह व्यवसाय पिछडता जा रहा है| अब युवक यह व्यवसाय अपनाने के लिए इच्छुक नही है| ‘शेती परिवार कल्याण संस्था’ ने, आज सांगली जिले में पशुपालन व्यवसाय को नई दिशा और प्रतिष्ठा प्रदान की ..

‘जनाधार’ने दिया कचरा उठानेवालों को आत्मसम्मान

एक तरफ, कचरा व्यवस्थापन की समस्या है, तो दूसरी ओर कचरा उठानेवाले समाज को आत्मसम्मान से जीने का अवसर देना, यह भी बडा आव्हान है| महाराष्ट्र के लातूर शहर की एक सेवा संस्था - जनाधार - ने इन दोनों समस्याओं को सुलझाते हुए एक व्यवस्था विकसित की है|..

महिला सबलीकरण : अहल्या महिला मंडल, पेण

सामाजिक विकास की दृष्टि हो तो किसी छोटे स्थान पर भी कितना बड़ा विकास कार्य आरंभ हो सकता है इसका उदाहरण है, महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित पेण का अहल्या महिला मंडल| ..

जनसेवा फाऊंडेशन ने बदली वनवासी किसानों की तकदीर

चार सूत्री अपनाने वाले किसानों के धान के उत्पादन में दुगनी-चौगुनी वृद्धि हुई| आज तक जनसेवा फाऊंडेशन ने ५००० से अधिक वनवासी किसानों इस चार सूत्री का प्रशिक्षण दिया है|..

प्रगति प्रतिष्ठान, ठाणे का कृषि विकास प्रकल्प

विकास की मूलभूत सुविधाओं के अभाव का शाप भोग रहे ठाणे जिले के जव्हार क्षेत्र के लोगों के विकास के लिए प्रगति प्रतिष्ठान ने शिक्षा, आरोग्य, कृषि, रोजगार के क्षेत्र में अनेक योजनाएँ आरंभ की है|..

चित्रकूट : गौवंश संवर्धन और कृषि में सफल प्रयोग

दीनदयाल शोध संस्थान ने, चित्रकूट क्षेत्र में गौवंश और कृषि सुधार से संबंधित कार्यांवित की योजनाओं के सफल परिणाम देखने को मिले है|..

कुपोषण की समस्या सुलझायी डॉ. हेडगेवार सेवा समिती ने

वनवासी क्षेत्रो मे कुपोषणसे होनेवाली बालकों की मृत्यू को रोकने के लिए महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले की डॉ. हेडगेवार सेवा समिती ने कुपोषण और गरिबी के जड तक जाने का निश्‍चय किया और तय किया की वनवासी ग्रामों की जीविका सुरक्षित करने से ही यह प्रश्‍न सुलझ सकता ह..

स्वयं विकास का आदर्श : ढगेवाडी

ढगेवाडी इस अकालग्रस्त गॉंव में लोगों की सालभर की आवश्यकता पूरी करने जितना भी अनाज पहले नहीं होता था| इसी गॉंव में आज लोग साल में दो-तीन फसल ले रहे है| टमाटर पर प्रक्रिया कर सॉस बनाने के लिए ‘अंबेमाता अभिनव टमाटर सॉस उत्पादक सहकारी संस्था’ स्थापित की है| इ..

Back to top